इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- विवाह पंजीकरण में आधार कार्ड उम्र निर्धारण का प्रमाण नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र के सत्यापन को अनिवार्य बनाने का निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की कोर्ट ने दीपक पाल की आपराधिक अपील के केस में फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर किसी की उम्र प्रमाणित नहीं मानी जा सकती। स्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र भी उम्र साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। विवाह पंजीकरण अधिकारी को वर और वधू दोनों की उम्र का विश्वसनीय दस्तावेजों से सत्यापन करना होगा। संदेह या विसंगति होने पर विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। मथुरा निवासी याची ने ट्रायल कोर्ट के रेप व पॉक्सो मामले में सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीकरण का उद्देश्य रिकॉर्ड तैयार करना नहीं बल्कि बाल विवाह रोकना, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और विवाह संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है।   विवाह पंजीकरण के लिए उम्र संबंधी दस्तावेजों की प्राथमिकता तय की जाए।

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