
- एनएसओ की लेबर मार्केट स्नैपशॉट ऑफ सिलेक्टेड डिस्ट्रिक्ट्स रिपोर्ट में खुलासा
गौरव चौहान/भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर में युवाओं को शिक्षा, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोडऩे के लिए योजनाएं तो कई हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा अब भी इन तीनों से बाहर हैं। भोपाल जिले में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 29.2 प्रतिशत युवा न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही कोई प्रशिक्षण ले रहे हैं। यानी हर 100 में करीब 29 युवा निठल्ले वाली स्थिति में हैं। यह अनुपात प्रदेश के औसत 22 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत अंक अधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की सितंबर 2026 में जारी लेबर मार्केट स्नैपशॉट ऑफ सिलेक्टेड डिस्ट्रिक्ट्स रिपोर्ट के ये आंकड़े राजधानी में युवाओं को अवसरों से जोडऩे की चुनौती सामने रखते हैं। प्रदेश के दस सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में इस मामले में भोपाल दूसरे स्थान पर है। ग्वालियर में यह अनुपात 29.3 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक है, जबकि जबलपुर में सबसे कम 16.5 प्रतिशत युवा शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण से बाहर हैं। भोपाल और जबलपुर के बीच 12.7 प्रतिशत अंक का अंतर है।
कामकाजी आबादी में भी भोपाल पीछे
भोपाल की तस्वीर केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। जिले में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की आबादी में महज 48.1 प्रतिशत लोग काम कर रहे हैं, जबकि प्रदेश का औसत 64.1 प्रतिशत है। इस पैमाने पर भोपाल राज्य के औसत से 16 प्रतिशत अंक पीछे है। जिले की बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत है, जो रिपोर्ट में शामिल दस बड़े जिलों की उपलब्ध दरों में सबसे अधिक है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि राजधानी में शिक्षा और रोजगार के अवसरों को युवाओं तक पहुंचाने के साथ ही कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक रोजगार से जोडऩे की जरूरत है। हालांकि, पढ़ाई, रोजगार और प्रशिक्षण से बाहर युवाओं का अनुपात सीधे बेरोजगारी दर नहीं बताता। इसमें वे युवा भी शामिल हैं, जो फिलहाल इन तीनों गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
योजनाओं के बावजूद पहुंच की चुनौती
युवाओं को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए समग्र शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट व्यवस्था पढ़ाई बीच में छोडऩे वाले विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा शुरू करने का अवसर देती है। मेधावी विद्यार्थी, जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं के जरिये आर्थिक सहायता भी दी जाती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं का शिक्षा और प्रशिक्षण से बाहर रहना योजनाओं के क्रियान्वयन और पहुंच पर सवाल खड़े करता है। शिक्षाविदों के अनुसार, केवल योजना शुरू करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण, आर्थिक-सामाजिक बाधाओं की पहचान और प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
ग्लोबल स्किल पार्क से प्लेसमेंट की उम्मीद
राज्य सरकार स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन के तहत उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा खेल एवं युवा कल्याण विभागों के समन्वय से काम कर रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को शिक्षा, रोजगार और शारीरिक-मानसिक विकास के अवसरों से जोडऩा है। भोपाल का ग्लोबल स्किल पार्क इस दिशा में एक प्रमुख पहल है। यहां उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षुओं को प्लेसमेंट से जोडऩे का प्रयास किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां प्रशिक्षुओं को सालाना तीन से 12 लाख रुपये तक के पैकेज मिल रहे हैं। आईटीआई, इंजीनियरिंग और ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवा भी प्रशिक्षण ले रहे हैं। ग्लोबल स्किल पार्क की सीईओ अदिति गर्ग के मुताबिक, युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। नई पीढ़ी को नए कौशल सिखाकर रोजगार के लिए तैयार करने पर जोर है। उनके अनुसार, ग्लोबल स्किल पार्क ने 98 प्रतिशत प्लेसमेंट दर हासिल की है।
राष्ट्रीय तुलना में 16वें स्थान पर प्रदेश
एनएसओ की रिपोर्ट में शामिल 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश 16वें स्थान पर है। बिहार में 15 से 29 वर्ष के युवाओं में एनईईटी श्रेणी का अनुपात सबसे अधिक 32.1 प्रतिशत है। पश्चिम बंगाल में यह 29.9 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 29.1 प्रतिशत है। सिक्किम में यह सबसे कम 8.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। बिहार और सिक्किम के बीच 23.7 प्रतिशत अंकों का अंतर है। एनईईटी यानी नॉट इन एम्प्लॉयमेंट, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग श्रेणी में 15 से 29 वर्ष के वे युवा शामिल होते हैं, जो न शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं। यह सामान्य बेरोजगारी दर से अलग पैमाना है। रिपोर्ट वर्ष 2025 के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण पर आधारित है। भोपाल के आंकड़े एक अहम सवाल छोड़ते हैं कि जब राजधानी में कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोडऩे की पहल मौजूद है, तो युवाओं का इतना बड़ा हिस्सा इन अवसरों से दूर क्यों है? चुनौती अब योजनाओं की संख्या बढ़ाने से आगे बढकऱ उन युवाओं तक पहुंचने की है, जो शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के मौजूदा तंत्र से बाहर हैं।
