जनविश्वास अभियान में खुली पंचायतों की व्यवस्था की पोल

जनविश्वास अभियान
  • अब घर से दफ्तर चलाने पर रोक

 भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। गांवों में पंचायत भवन बनाने के बावजूद यदि ग्रामीणों को सरपंच, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक से मिलने के लिए उनके घरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो अब व्यवस्था बदलनी होगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत भवन तैयार होने के बाद कार्यालय का संचालन वहीं से करना अनिवार्य होगा। घर से पंचायत कार्यालय चलाने और सरकारी रिकॉर्ड व सामग्री आवासों में रखने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। अब जनपद पंचायत के सीईओ औचक निरीक्षण कर यह जांचेंगे कि पंचायत भवन वास्तव में कार्यालय की तरह संचालित हो रहे हैं या सिर्फ सरकारी इमारत बनकर रह गए हैं।
विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के दौरान पंचायतों के कामकाज में सामने आई कमियों के बाद यह कदम उठाया गया है। जांच में कहीं पंचायत कार्यालय आवासों से संचालित होते मिले, तो कहीं सरकारी दस्तावेज, फर्नीचर, टीवी, कंप्यूटर और दूसरी सामग्री पंचायत भवन के बजाय घरों में रखी मिली। विभाग ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से गंभीर माना है।
भवन बने, लेकिन कार्यालय की व्यवस्था घरों में
पंचायत भवनों का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। इसके लिए कार्यालय में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की उपलब्धता जरूरी है। लेकिन जब कार्यालय का संचालन घर से होता है या पंचायत भवन नियमित रूप से नहीं खुलता, तो ग्रामीणों को अपने काम के लिए संबंधित कर्मचारियों को तलाशना पड़ता है। इससे न केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि पंचायत के कामकाज में पारदर्शिता भी प्रभावित हो सकती है। विभाग ने निर्देश दिया है कि पंचायत भवन में कार्यालय का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। पंचायत के जरूरी दस्तावेज और सरकारी सामग्री भी वहीं रखी जाए। अब व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसका उपयोग और नियमित संचालन भी जांच के दायरे में होगा।
भवन नहीं बना तो सामुदायिक भवन बनेगा कार्यालय
जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, वहां भी कार्यालय बंद रखने या घर से संचालित करने की छूट नहीं होगी। ऐसी पंचायतों को सामुदायिक भवन या बहुउद्देश्यीय भवन से नियमित रूप से कामकाज करना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन निर्माण की स्थिति चाहे जो हो, ग्रामीणों को पंचायत कार्यालय की सेवाएं मिलती रहें।
औचक निरीक्षण में तीन बिंदुओं पर रहेगी नजर
विभाग ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा-पंचायत भवन नियमित रूप से खुलता है या नहीं। सरपंच, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक निर्धारित समय पर उपलब्ध हैं या नहीं। जरूरी दस्तावेज, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सामग्री पंचायत भवन में रखी गई है या नहीं। यदि कार्यालय नियमित रूप से संचालित नहीं होता या पंचायत सचिव और रोजगार सहायक बिना अनुमति अनुपस्थित मिलते हैं, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस व्यवस्था से पंचायतों में कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
25 दिसंबर को 2472 नए पंचायत भवनों का लोकार्पण
दूसरी ओर, प्रदेश में पंचायतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर 2472 नए पंचायत भवनों का लोकार्पण किया जाएगा। पंचायत भवनों के पारंपरिक डिजाइन में बदलाव करते हुए अब दो मंजिला भवन बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक भवन के लिए 37.50 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग ने 25 लाख से 48 लाख रुपये तक की लागत से 3700 से अधिक सामुदायिक भवन भी तैयार कराए हैं। इन भवनों का उपयोग स्थानीय जरूरतों के साथ उन पंचायतों में कार्यालय संचालन के लिए भी किया जा सकता है, जहां पंचायत भवन का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। अब असली कसौटी भवनों की संख्या नहीं, उनका उपयोग होगा। विभाग के नए निर्देशों के बाद पंचायतों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि औचक निरीक्षण नियमित होते हैं या नहीं और घरों से संचालित हो रहे कार्यालय वास्तव में पंचायत भवनों में स्थानांतरित हो पाते हैं या नहीं।

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