
- जमानत याचिका पर हुई सुनवाई…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। एमपी हाईकोर्ट के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया। सरकारी पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। जमानत मिलने की स्थिति में गवाहों और साक्ष्यों पर असर पड़ने की आशंका भी जताई गई। सीबीआई की ओर से बताया गया कि जांच के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। सरकारी पक्ष के अनुसार, इन रिपोर्टों के आधार पर मामले में आगे कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल ट्विशा शर्मा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मामले में पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज हत्या तथा दहेज अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल की जिला एवं सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। मामले में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठी थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए थे। बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और वह करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में हैं।
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वकील ने जमानत के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। बचाव पक्ष ने उनकी उम्र, बीमारियों और करीब पांच महीने से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला भी दिया। यह तर्क भी रखा गया कि सीबीआई ने उनके खिलाफ दहेज अधिनियम की धाराओं में चालान पेश नहीं किया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। फिलहाल जमानत पर अंतिम निर्णय नहीं आया है।
