कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ पूरा होगा एक दशक पुराना सपना

सपना
  • सीपीसीटी की शर्त हटाने की तैयारी
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।
    प्रदेश के 15 हजार से अधिक चतुर्थ श्रेणी शासकीय सेवकों का पदोन्नति को लेकर इंतजार खत्म होने वाला है। जल्द ही सरकार उन्हें तृतीय श्रेणी लिपिक वर्ग में पदोन्नत करेगी। अभी इन चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में ज्यादातर का पदनाम भूत्य है। दरअसल, मोहन सरकार ने इनके प्रमोशन में आने वाली सबसे बड़ी बाधा कम्प्यूटर दक्षता प्रमाण-पत्र (सीपीसीटी) परीक्षा की बाध्यता को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
    मंत्रालय: बनाना था बाबू, बना दिया दरबान: प्रदेश में नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मी 45 हजार से 48 हजार है। इन्हें पदोन्नति दिए जाने के नियमों में एकरुपता नहीं है। ऐसा इसलिए, योंकि पूर्व में सामान्य प्रशासन विभाग ने अलग-अलग आदेश जारी कर रखे हैं। इन्हीं आदेशों का सहारा लेते हुए मंत्रालय के पीएचई समेत अन्य विभागों ने इनको तृतीय श्रेणी की बजाए चतुर्थ श्रेणी काडर में ही दरबान जैसे पदों पर पदोन्नत कर दिया। जबकि ज्यादातर विभागों ने आदेशों में स्पष्टता का अभाव मानकर पदोन्नति ही नहीं दी। जिन कर्मियों को दतरी के पद पर पदोन्नत किया, उनका कहना है कि वे तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति के लिए पात्र है।
    31 विभागों ने नहीं दी पदोन्नति: प्रदेश के 55 जिलों में से हर में 31 विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को पदोन्नति ही नहीं दी। हालांकि राजस्व विभाग ने कुछ शर्तों के साथ अपने कर्मियों को पदोन्नत किया। ऐसे में सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के पदोन्नति से जुड़े नियमों में एकरूपता के लिए कदम बढ़ाए हैं।
    एक दशक से इंतजार कर रहे कर्मचारी
    बता दें, एक दशक से चतुर्थ श्रेणी संवर्ग के कर्मचारी पदोन्नति को लेकर प्रतीक्षारत रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इनकी पदोन्नति में सामान्य प्रशासन जीएडी) ने सीपीसीटी परीक्षा का रोड़ा बताया था, जिस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने बाध्यता खत्म कर नए सिरे से प्रस्ताव बनाने के आदेश दिए। उम्मीद है कि 3-4 दिनों के भीतर आदेश भी जारी हो जाएंगे।

Related Articles