
- सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार रोकने की चुनौती बरकरार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार रोकने की चुनौती अब भी बनी हुई है। लोकायुक्त के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में रिश्वत लेते पकड़े जाने के 91 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। यानी चार महीने में औसतन हर महीने 22 से अधिक मामलों में कार्रवाई हुई। राजस्व, नगरीय प्रशासन, वन, सहकारिता और महिला एवं बाल विकास सहित कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी इन कार्रवाइयों की जद में आए।
लोकायुक्त के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि ट्रैप प्रकरणों की संख्या में साल-दर-साल उतार-चढ़ाव रहा है। वर्ष 2022-23 में 238 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 162 रह गई। वर्ष 2024-25 में 215 और 2025-26 में 222 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए। ये आंकड़े रिश्वतखोरी के मामलों में लगातार गिरावट का स्पष्ट संकेत नहीं देते। हालांकि, ट्रैप की संख्या से अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भ्रष्टाचार बढ़ा है या घटा है। शिकायतों की संख्या, सत्यापन की प्रक्रिया और कार्रवाई की सक्रियता भी आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है।
कई विभागों के कर्मचारी कार्रवाई की जद में
लोकायुक्त की कार्रवाई में अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी पकड़े गए हैं। अप्रैल में रायसेन जिले की उदयपुरा नगर परिषद के उपयंत्री को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। इसी महीने सागर में वन विभाग के रेंजर और लिपिक को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया। दिए गए विवरण के अनुसार, जुलाई में राजगढ़ जिले के जीरापुर में सहायक समिति प्रबंधक के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई हुई। सितंबर में वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के दो कर्मचारी 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए, जबकि अक्टूबर की शुरुआत में महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अकाउंटेंट के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। सितंबर और अक्टूबर की घटनाएं अप्रैल-जुलाई के 91 मामलों से अलग अवधि की हैं। इसलिए इन्हें चार महीने के आंकड़े में शामिल नहीं किया जा सकता।
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी
ट्रैप कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े जाने वाले लोकसेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किए जाते हैं। लोकायुक्त की प्रक्रिया में शिकायत का सत्यापन और उसके बाद कार्रवाई शामिल होती है। लेकिन भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह देखना भी जरूरी है कि शिकायतें किन सेवाओं और विभागों से अधिक आ रही हैं, नागरिकों को किन कामों के लिए अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ता है और कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। ट्रैप की संख्या कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने की सफलता का आकलन शिकायतों के निपटारे, सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था से भी किया जाना चाहिए।
