बजट में खर्च की कसौटी सख्त, बेअसर योजनाओं पर लगेगा ब्रेक

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  • 2027-28 के बजट का प्रारंभिक खाका तैयार, 12 अक्टूबर से प्रस्तावों की दोबारा पड़ताल; दिसंबर में आएगा दूसरा अनुपूरक बजट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश सरकार के आगामी बजट में नई योजनाओं को जगह देने से पहले उनकी जरूरत और वित्तीय औचित्य की जांच होगी। वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट की तैयारी के तहत विभागवार चर्चा का पहला चरण पूरा कर लिया है। अब 12 अक्टूबर से दूसरे चरण में चुनिंदा प्रस्तावों की दोबारा पड़ताल होगी। विभागों को ऐसी योजनाओं की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जो उपयोगिता खो चुकी हैं। समान उद्देश्य वाली योजनाओं को मिलाने और अप्रभावी योजनाओं को बंद करने पर विचार किया जाएगा। इस बार बजट निर्माण की प्रक्रिया में केवल विभागों की मांग के आधार पर राशि तय नहीं होगी, बल्कि प्रस्तावों की जरूरत, प्राथमिकता और संभावित खर्च का भी आकलन किया जाएगा। पहले चरण में वित्त विभाग के अधिकारियों ने विभागों के उप सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ बैठकें कर नई योजनाओं और मौजूदा कार्यक्रमों के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत समझी। इसके आधार पर बजट का प्रारंभिक खाका तैयार किया गया है।
विभागों ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अलग-अलग योजनाओं और मदों में राशि की मांग रखी है। अब वित्त विभाग यह देखेगा कि प्रस्तावित खर्च कितना जरूरी है और उसके अपेक्षित परिणाम क्या होंगे। दूसरे चरण में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ दोबारा चर्चा कर राशि की जरूरत और प्रस्तावों की प्राथमिकता पर विचार किया जाएगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक चलेगी। नई योजनाओं के प्रस्तावों के लिए भी शर्तें तय की गई हैं। विभागों को सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के साथ योजना का उद्देश्य, वित्तीय आवश्यकता, अपेक्षित परिणाम और संसाधनों के स्रोत का स्पष्ट विवरण देना होगा। इससे बिना पर्याप्त तैयारी के नए वित्तीय दायित्व जोडऩे की गुंजाइश सीमित करने की कोशिश होगी।
योजनाओं का विलय, दोहराव वाले खर्च पर नजर
वित्त विभाग ने विभागों को ऐसी योजनाओं की समीक्षा करने को कहा है, जिनकी उपयोगिता समाप्त हो चुकी है। समान उद्देश्य वाली योजनाओं के विलय पर भी विचार किया जाएगा। इसका मकसद एक जैसे कामों के लिए अलग-अलग योजनाओं में होने वाले खर्च की समीक्षा करना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। राज्य का बजट 2025-26 में 4.21 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 4.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। ऐसे में आगामी बजट में विभागों की बढ़ती वित्तीय जरूरतों के साथ उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि कितनी योजनाएं बंद होगी या कितनी को मिलाया जाएगा।
जनवरी में वित्त मंत्री स्तर पर होगी चर्चा
बजट तैयार करने के लिए आगे की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। अक्टूबर के अंत तक दूसरे चरण की चर्चा पूरी होने के बाद 16 नवंबर से 14 दिसंबर के बीच सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ तीसरे चरण की बैठकें होंगी। इसके बाद 15 से 31 जनवरी 2027 के बीच वित्त मंत्री स्तर पर विभागवार बजट प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बजट भाषण के लिए जरूरी जानकारी भेजने की अंतिम तारीख 15 जनवरी निर्धारित की गई है। वित्त विभाग ने पुनर्विनियोजन, समायोजन और पुनप्र्राप्ति से जुड़े आदेश 31 मार्च तक भेजने की समयसीमा भी तय की है। विभागों से मिले प्रस्तावों और विभिन्न चरणों की चर्चाओं के आधार पर बजट प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाएगा। वर्ष 2026-27 का बजट भी रोलिंग बजट प्रणाली के तहत तैयार किया गया था। इसी व्यवस्था के आधार पर 2027-28 के बजट की तैयारी की जा रही है।
दूसरे अनुपूरक बजट के लिए 22 अक्टूबर तक प्रस्ताव
एक ओर अगले वित्तीय वर्ष के बजट की तैयारी चल रही है, वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दूसरे अनुपूरक बजट की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। वित्त विभाग ने सभी विभागों से 22 अक्टूबर तक आईएफएमआईएस पोर्टल पर ऑनलाइन प्रस्ताव भेजने को कहा है। केवल ऑनलाइन प्राप्त प्रस्ताव ही स्वीकार किए जाएंगे। विभागों को उन्हीं मदों के प्रस्ताव भेजने के निर्देश हैं, जिनमें आकस्मिकता निधि से अग्रिम स्वीकृति मिली हो, वित्त विभाग की सहमति प्राप्त हो या केंद्र सरकार अथवा किसी अन्य एजेंसी से वित्तीय सहायता स्वीकृत हुई हो। संबंधित खर्च के लिए विभाग अपनी मौजूदा योजनाओं की बचत से संसाधन जुटाने में सक्षम नहीं होना चाहिए। विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत नए बजट प्रावधान की जरूरत और केंद्र से स्वीकृत कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि की मांग भी निर्धारित शर्तों के तहत की जा सकेगी। दूसरी ओर, राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त भार डालने वाले नए मदों और वाहन खरीदी के प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। दूसरा अनुपूरक बजट दिसंबर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। इस तरह सरकार के सामने एक साथ दो वित्तीय प्राथमिकताएं हैं-चालू वर्ष के स्वीकृत खर्चों के लिए जरूरी अतिरिक्त प्रावधान करना और अगले बजट में योजनाओं तथा विभागीय मांगों को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित करना।

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