
- भोपाल नगर निगम के रवैये पर कड़ी असंतुष्टि व्यक्त की
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) समेत अन्य प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटाई के बदले किए जाने वाले क्षतिपूर्ति पौधरोपण मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने 80 हजार पौधों के रोपण, करोड़ों के फंड का हिसाब मांगा है। इसकी रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना विरुद्ध एनएचएआई व अन्य से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह, विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मंगलवार को आदेश पारित किया। जिसमें राज्य शासन, वन विभाग और भोपाल नगर निगम के रवैये पर कड़ी असंतुष्टि व्यक्त की।
संबंधित विभागों के लिए सख्त समय-सीमा
पूर्व आदेश के बावजूद कोई जवाब पेश न करने पर ट्रिब्यूनल ने बीएमसी को अगली सुनवाई से पूर्व अनिवार्य रूप से जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 कार्य दिवस के भीतर अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश करेगा। ?वन विभाग पेड़ों की कटाई के बदले जमा राशि के सत्यापन और एसडीओ द्वारा उठाए गए सवालों के निवारण के साथ 4 सप्ताह के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सभी जिम्मेदार एजेंसियों को समय-सीमा के भीतर ठोस और सत्यापित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। प्रकरण की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को नियत की गई है।
निगम को एक महीने में पूरा करना होगा पौधारोपण
एनजीटी ने नगर निगम को एक महीने में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधारोपण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। पौधारोपण अतिरिक्त और निर्धारित खुले क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि हरित क्षेत्र का वास्तविक नुकसान पूरा हो सके। इसके लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी करनी होगी। पेड़ कटाई के एवज में जमा राशि का उपयोग सिर्फ पौधारोपण, रखरखाव और पौधों के सर्वाइवल के लिए किया जाए। पुराने पौधारोपण के बीच खाली जगह भरने को क्षतिपूर्ति पौधारोपण नहीं माना जाएगा। निगम को लगाए गए पौधों के सर्वाइवल की जांच कर फोटो सहित रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।
एनजीटी का बजटीय कोष के इस्तेमाल पर सवाल
एनजीटी ने वन विकास और डीएफओ (पर्यावरण वानिकी मंडल) से सीधा सवाल किया है कि वर्ष 2025 में पौधारोपण के लिए जो राशि जमा कराई गई थी, उससे वर्ष 2026 के मानसून सत्र में पौधरोपण की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
पीसीसीएफ और वन बल प्रमुख को यह आदेश: पीठ ने भोपाल नगर निगम और डीएफओ को निर्देश दिए कि पिछले 5 वर्षों में रोपे गए उन सभी पौधों का हिसाब लगाया जाए, जो पानी या रखरखाव के अभाव में सूख गए हैं। उपलब्ध बजट की बचत राशि से तुरंत कैजुअल्टी रिप्लेसमेंट (मृत पौधों के स्थान पर नए पौधे) किया जाए, ताकि 100 प्रतिशत उत्तरजीविता सुनिश्चित हो सके।
विभिन्न विभागों के लिए समय-सीमा तय
मामले में लापरवाही बरतने वाली संस्थाओं के लिए ट्रिब्यूनल ने कड़ी समय-सीमा निर्धारित की है। पूर्व आदेशों के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर भोपाल नगर निगम को अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 10 कार्य दिवसों के भीतर अपनी वर्तमान स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। वहीं वन विभाग को पेड़ों की कटाई के एवज में जमा हुई राशि का सत्यापन करने और उप-संभागीय अधिकारी द्वारा उठाए प्रश्नों का समाधान करते हुए चार सप्ताह के भीतर अंतिम विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर की तिथि निश्चित की है।
