
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप सामने आने के साथ ही शहर के अगले दो दशक के विकास की दिशा को लेकर जमीन से जुड़े हितों का टकराव सामने आने लगा है। प्रारूप जारी होने के महज छह दिन में 249 से ज्यादा आपत्तियां और सुझाव दर्ज हो चुके हैं। इनमें 236 आपत्तियां ऑनलाइन और 13 ऑफलाइन आई हैं। सबसे ज्यादा आपत्तियां निजी जमीन के उपयोग, प्रस्तावित सडक़ों, कृषि और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र को लेकर हैं। मास्टर प्लान में कई इलाकों की मौजूदा बसाहट और जमीन के प्रस्तावित उपयोग के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। बैरागढक़लां और आसपास के गांवों में बसाहट वाली जमीन को प्रतिबंधित जोन में रखने पर आपत्ति की गई है। वहीं लहारपुर में करीब तीन दशक से खेती की जा रही 643 एकड़ जमीन को डूब क्षेत्र से बाहर रखने की मांग उठी है। कई आपत्तियों में प्रस्तावित 18 मीटर चौड़ी सडक़ों, सडक़ अलाइनमेंट और बाघों के मूवमेंट वाले क्षेत्रों से प्रस्तावित मार्ग हटाने की मांग भी की गई है।
मास्टर प्लान के सामने चुनौती सिर्फ जमीन के उपयोग का निर्धारण करने की नहीं है। भोपाल में एक साथ कई बड़ी परिवहन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। निशातपुरा क्षेत्र में निजी जमीन से जुड़ी भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन, पश्चिम भोपाल बायपास के लिए थुआखेड़ा, रतनपुर सडक़ और आंवला क्षेत्र में चल रही प्रक्रिया तथा प्रस्तावित 83.18 किमी आउटर रिंग रोड इसी बड़े परिवहन नेटवर्क के हिस्से हैं। ड्राफ्ट में नर्मदापुरम रोड के 11 मील से सीहोर रोड तक 51 किमी लंबा और 75 मीटर चौड़ा मार्ग भी प्रस्तावित है। हालांकि किसी मार्ग का मास्टर प्लान में शामिल होना अपने आप में स्वीकृत डीपीआर, इंटरचेंज, निर्माण शुरू होने या भूखंड स्तर पर विकास अधिकार की गारंटी नहीं है। यही वजह है कि विशेषज्ञों के मुताबिक मास्टर प्लान की असली चुनौती अलग-अलग परियोजनाओं को कागज पर दर्ज करने के बजाय उन्हें एक साझा महानगरीय नेटवर्क के रूप में जोडऩे की है।
बैरागढ़ को कमर्शियल हब बनाने की मांग: मास्टर प्लान को लेकर संत हिरदाराम नगर और बैरागढ़ क्षेत्र से अलग तरह की मांग सामने आई है। क्षेत्र के संगठनों ने बैरागढ़ को व्यावसायिक क्षेत्र घोषित करने और आसपास के फंदा क्षेत्र की जमीन को आवासीय उपयोग में शामिल करने का सुझाव दिया है। नरेश ज्ञानचंदानी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मास्टर प्लान में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि संत हिरदाराम नगर मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के कपड़ा व्यापार का प्रमुख केंद्र है। यहां के व्यापार से रोजगार और राजस्व दोनों जुड़े हैं। संगठन ने बैरागढक़लां, भौरी, कोलूखेड़ी, खजूरी और फंदा की जमीन को आवासीय उपयोग में शामिल करने का सुझाव दिया है।
अब आपत्तियों से तय होगी तस्वीर: मास्टर प्लान का मौजूदा प्रारूप शहर के भविष्य के लिए प्रस्तावित विकास और मौजूदा जमीन उपयोग के बीच संतुलन की चुनौती सामने रखता है। एक तरफ मेट्रो, बायपास, आउटर रिंग रोड और ग्रोथ कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट हैं, तो दूसरी तरफ निजी जमीन, खेती, मौजूदा बसाहट, पर्यावरणीय क्षेत्र और स्थानीय व्यापारिक जरूरतें हैं। अब इन 249 से ज्यादा आपत्तियों और सुझावों पर होने वाली सुनवाई और परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। इन्हीं के आधार पर यह तय होगा कि 2047 के भोपाल का प्रस्तावित नक्शा मौजूदा जमीन की हकीकत के कितना करीब आता है।
51 किमी के कॉरिडोर से कहीं बड़ा है प्लान
क्रेडाई अध्यक्ष और कमाल का भोपाल के फाउंडर मनोज मीक के मुताबिक भोपाल विकास योजना-2047 को केवल 51 किमी लंबे ग्रोथ कॉरिडोर तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। प्रकाशित प्रारूप करीब 1016.90 वर्ग किमी के निवेश क्षेत्र, 254 गांव, लगभग 45 लाख अनुमानित आबादी और 61,017.02 हेक्टेयर प्रस्तावित विकास योग्य क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उनके अनुसार मेट्रो, आउटर रिंग रोड, पश्चिमी बायपास, ग्रोथ कॉरिडोर, रेडियल सडक़ें, एयरपोर्ट, रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय एकीकृत परिवहन और विकास नेटवर्क के रूप में देखना होगा।
