- संख्या 10 से बढक़र 15 हुई…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। टीकमगढ़ नगर पालिका की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। करीब एक साल पहले कांग्रेस छोडक़र भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पांच पार्षदों ने भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दोबारा कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला के नेतृत्व में भोपाल पहुंचे पार्षदों की राज्यसभा सांसद अशोक सिंह, संगठन उपाध्यक्ष सुखदेव पांसे और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह चौहान की मौजूदगी में कांग्रेस में वापसी हुई। कांग्रेस में लौटने वाले पार्षदों में छीता बाई वीरेंद्र कुशवाहा, अरविंद रजक, राखी ध्रुव यादव, अंशुल जैन और रामकुमार यादव शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं ने सभी पार्षदों का स्वागत करते हुए उनकी घर वापसी पर बधाई दी। पांच पार्षदों के लौटने के बाद टीकमगढ़ नगर पालिका में कांग्रेस पार्षदों की संख्या 10 से बढक़र 15 हो गई है।
नगर पालिका के राजनीतिक समीकरणों पर असर
पांच पार्षदों की कांग्रेस में वापसी से टीकमगढ़ नगर पालिका में पार्टी की संख्या बढ़ गई है। स्थानीय निकाय की राजनीति में इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इससे नगर पालिका के कामकाज और राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, जनहित और जनता की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्षदों की वापसी से टीकमगढ़ में कांग्रेस संगठन को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।
भाजपा में सम्मान और विकास कार्यों को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस में वापस लौटे पार्षद रामकुमार यादव ने भाजपा में सम्मान नहीं मिलने और अपने वार्डों में विकास कार्य कराने में परेशानी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि करीब एक साल पहले, 13 सितंबर 2025 को भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान भाजपा में शामिल होने को लेकर चर्चा हुई थी। रामकुमार यादव के मुताबिक, उस समय तय हुआ था कि टीकमगढ़ में भाजपा का कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने पर सार्वजनिक रूप से उनकी सदस्यता कराई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में मुख्यमंत्री कई बार टीकमगढ़ आए, लेकिन इसके बावजूद उनकी औपचारिक सदस्यता नहीं कराई गई। पार्षद ने कहा कि भाजपा में उपेक्षा महसूस होने और अपने वार्डों में विकास कार्य कराने में आ रही परेशानियों के चलते उन्होंने कांग्रेस में लौटने का फैसला किया।
