पुराने मास्टर प्लान की सडक़ें आज तक नहीं बनीं

मास्टर प्लान
  • मास्टर प्लान- 2047 पर आपत्तियां आना शुरू, पुरानी सडक़ों का हिसाब बाकी
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम।
    मास्टर प्लान-2047 को लेकर सोमवार से दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले दिन निर्धारित टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग के पोर्टल पर 33 और उसके ई-मेल पर 30 आपत्तियां दर्ज कराई गयी हैं। इसके अलावा 2 आपत्तियां जिला कलेक्टर कार्यालय में आफलाइन मिली हैं। नए प्लान के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने मास्टर प्लान की जमीन पर अधूरी पड़ी योजनाओं को प्रभावी करने की है। नए मसौदे में सडक़ की चौड़ाई को जमीन के उपयोग और व्यवसायिक गतिविधियों से जोडऩे की तैयारी है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नक्शे में दर्ज सडक़ की चौड़ाई और जमीन पर उसकी वास्तविक स्थिति में कितना अंतर है। वर्ष 2005 के प्लान में 24 से 60 मीटर तक चौड़ी कुई सडक़ें प्रस्तावित थीं, लेकिन कहीं मकान-बस्ती, कहीं कॉलोनी और कहीं कैंपस के कारण ये सडक़ें बन ही नहीं सकीं।
    30 मीटर सडक़ के रास्ते में थे 446 मकान: अयोध्या बाईपास से प्रभात स्क्वायर तक प्रस्तावित 30 मीटर चौड़ी और 7.70 किलोमीटर लंबी सडक़ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसका रास्ता समरा कलां और हिनोतिया काछियां से होते हुए करोंद स्क्वायर तक प्रस्तावित था।
    कहीं कॉलोनी-कैंपस तो कहीं बाईपास बना वजह: छोला से बेस्ट प्राइस के बीच प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी और 2.60 किलोमीटर लंबी सडक़ के रास्ते में बाद में कॉलोनियां विकसित हो गई। नेवरी की 24 मीटर चौड़ी सडक़ बस्ती के कारण अटक गई, जबकि आरजीपीवी क्षेत्र की 24 मीटर चौड़ी सडक़ के रास्ते में कैंपस और इमारतें आ गईं। वहीं मुबारकपुर स्क्वायर से बैरसिया रोड के बीच प्रस्तावित 60 मीटर चौड़ी और 8.35 किलोमीटर लंबी सडक़ की जरूरत समानांतर बाईपास बनने के बाद खत्म हो गई। मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के अनुसार, नई कॉलोनियों में सडक़ की चौड़ाई के आधार पर दुकान, ऑफिस, अस्पताल या मॉल खोलने की गुंजाइश तो दी है, लेकिन लेआउट पास करते समय ही यह तय करना होगा कि कमर्शियल या मिक्स लैंड यूज के प्लॉट कहां होंगे। नई कॉलोनी में कुल आवासीय क्षेत्र के अधिकतम 5 प्रतिशत हिस्से में ही स्थानीय जरूरतों वाली दुकानें खोलने की अनुमति होगी।
    दावे-आपत्तियों में उठेगा नक्शे और जमीन का सवाल
    नए ड्राफ्ट में 12 मीटर से कम चौड़ी सडक़ों पर पूर्ण व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं, जबकि सडक़ की चौड़ाई बढऩे के साथ व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। ऐसे में दावे-आपत्तियों के दौरान यह सवाल अहम रहेगा कि किसी इलाके में सडक़ की चौड़ाई वास्तव में जमीन पर मौजूद है या केवल मास्टर प्लान के नक्शे में दर्ज है। 2005 के अनुभव को देखते हुए नए प्लान में सडक़, लैंड यूज और मौजूदा निर्माण का जमीनी मिलान करना बड़ी चुनौती होगी (मास्टर प्लान-2047 के लिए सोमवार से ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से दावे-आपत्तियां लेना शुरू किया गया है। एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि आपत्तियों की सुनवाई के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था रखी गई है।

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