
- अब तक सिर्फ 21 को नियमित पदोन्नति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल से विभिन्न बिजली कंपनियों में स्थानांतरित किए गए मंडल संवर्ग के अभियंताओं की पदोन्नति का मामला वर्षों से अटका हुआ है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि 36 से 37 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी कई कनिष्ठ अभियंता (जेई) केवल एक नियमित पदोन्नति ही हासिल कर सके हैं। समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) नहीं होने के कारण लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अभियंताओं के सामने अब सेवानिवृत्ति से पहले अगला पद पाने का संकट खड़ा हो गया है।
मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने लंबित डीपीसी की प्रक्रिया पूरी कर वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर पदोन्नति देने की मांग की है। संघ का कहना है कि यदि समय पर डीपीसी होती रहती तो जिन अभियंताओं को अब सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति मिली है, वे सेवा अवधि के हिसाब से अब तक अधीक्षण यंत्री या उससे ऊपर के पद तक पहुंच चुके होते।
115 पद आरक्षित, नियमित पदोन्नति सिर्फ 21 को
संघ के अनुसार, 9 जून 2011 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के तहत मंडल संवर्ग के लिए कार्यपालन यंत्री के 115 पद आरक्षित किए गए थे। इनमें अब तक केवल 21 अधिकारियों को नियमित पदोन्नति मिल सकी है, जबकि सात अधिकारी कार्यपालन यंत्री का चालू प्रभार संभाल रहे हैं। संगठन का आरोप है कि मंडल संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर अन्य संवर्ग के अभियंताओं को पदोन्नति या चालू प्रभार दिए जाने से मंडल संवर्ग के वरिष्ठ अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हुए हैं। संघ का कहना है कि आरक्षित पदों और पात्र अधिकारियों की स्थिति को स्पष्ट करते हुए लंबित डीपीसी पूरी की जानी चाहिए।
पांच साल की बाध्यता से सेवानिवृत्ति का संकट
वर्तमान पदोन्नति नीति में अगली पदोन्नति के लिए पांच वर्ष की सेवा की बाध्यता है। संघ का कहना है कि जो अभियंता पहले ही कई दशक की सेवा पूरी कर चुके हैं, उनके लिए यह शर्त व्यावहारिक रूप से मुश्किल पैदा कर रही है। पांच वर्ष की आवश्यक सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही इनमें से कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो सकते हैं। इसी वजह से संघ ने लंबित डीपीसी तत्काल कराने और पात्र कनिष्ठ अभियंताओं को सहायक अभियंता पद पर पदोन्नति देने की मांग की है। साथ ही वर्ष 2026 की प्रक्रिया में पात्र अधिकारियों को कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्नति देने की मांग भी की गई है।
कंपनी ने कहा- निर्धारित नीति के अनुसार हो रही पदोन्नति
मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) डा. राकेश शर्मा ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों को मध्यप्रदेश सरकार की निर्धारित पदोन्नति नीति के अनुसार ही पदोन्नति दी जा रही है। इसी नीति के आधार पर पात्र अधिकारियों के पदोन्नति प्रस्ताव भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर कोई आपत्ति या असहमति है, तो वह अपनी बात उच्च अधिकारियों के समक्ष रख सकता है।
पदोन्नति का मामला
36-37 साल की सेवा के बाद भी कई जेई सीमित पदोन्नति तक ही पहुंचे।
मंडल संवर्ग के लिए कार्यपालन यंत्री के 115 पद आरक्षित किए गए थे।
संघ के अनुसार अब तक 21 अधिकारियों को नियमित पदोन्नति मिली।
सात अधिकारी कार्यपालन यंत्री का चालू प्रभार संभाल रहे हैं।
संघ ने लंबित डीपीसी पूरी करने की मांग की है।
पांच वर्ष की सेवा शर्त के कारण सेवानिवृत्ति से पहले अगली पदोन्नति नहीं मिलने की चिंता।
बिजली कंपनी का कहना है कि पदोन्नति सरकार की निर्धारित नीति के अनुसार की जा रही है।
