
शिक्षा मंत्रालय ने ‘अपार आईडी’ की प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव किया है। अब छात्रों की यह डिजिटल आईडी पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नौकरी के दौरान शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन में भी इस्तेमाल की जा सकेगी। अपडेटेड नीति के मुताबिक, अधिकृत नियोक्ता छात्र की सहमति मिलने के बाद उसके डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों का डिजिटल सत्यापन कर सकेंगे। अपार यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री में छात्र का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहता है। हालांकि, केवल अपार आईडी उपलब्ध होने से कोई नियोक्ता छात्र का पूरा रिकॉर्ड नहीं देख सकेगा। नियोक्ता को पहले वेरिफायर के तौर पर पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद वह किसी विशेष दस्तावेज के सत्यापन की रिक्वेस्ट भेजेगा। छात्र को इसकी सूचना मिलेगी और वह ओटीपी या ई-साइन के जरिए मंजूरी देगा। इसके बाद ही संबंधित रिकॉर्ड नियोक्ता को दिखाई देगा। छात्र रिक्वेस्ट को मंजूर या अस्वीकार भी कर सकता है। नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य नौकरी के लिए जमा किए जाने वाले शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचना है। उम्मीदवार सीवी में जिस डिग्री या संस्थान का उल्लेख करेगा, नियोक्ता उसके डिजिटल रिकॉर्ड का सत्यापन कर सकेगा। इससे फर्जी डिग्री और प्रमाण-पत्रों की पहचान आसान होने का दावा किया जा रहा है। अपार आईडी को लेकर डेटा की खरीद-फरोख्त के आरोप शुरु से लगते रहे हैं।
