रिटायरमेंट ज्यादा, भर्ती कम सूने हो रहे सरकारी दफ्तर

सरकारी दफ्तर
  • रिटायरमेंट ज्यादा लेकिन नई भर्तियां कम
    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। राजधानी सहित प्रदेश भर के सरकारी दफ्तर में कर्मचारी और अधिकारियों की कमी निरंतर बढ़ती जा रही है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर साल रिटायर होने वाली सरकारी कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है और उसके अनुपात में नई भर्तियां बहुत कम हो रहीं हैं। गृह और शिक्षा विभाग को छोडक़र बाकी सभी विभागों में सीधी भारतीयों पर रोक है, जबकि हर साल औसतन 22000 से ज्यादा कर्मचारी सेवा से रिटायर हो रहे हैं। इसकी वजह से सरकारी विभागों में पद खाली होते चले जा रहे हैं, जबकि नई भर्तियां उससे आधी भी नहीं हो रही है इसका सीधा असर सरकार के कामकाज पर भी पड़ रहा है।
    ज्यादातर कर्मचारी 1977-78 के: कर्मचारी मामलों से नजदीक से जुड़े रहे एमपी द्विवेदी का कहना है कि फिलहाल प्रदेश भर के सरकारी विभागों में ज्यादातर कर्मचारी 1977-78 और उसके बाद के वर्षों के हैं जिनमें से ज्यादातर की सेवा 44 साल और उम्र करीब 60 साल हो चुकी है यही वजह है कि हर साल सरकारी विभागों से रिटायर होने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ रही है लेकिन उसके अनुपात में नई भर्तियां नहीं होने की वजह से कर्मचारियों का संतुलन सभी विभागों में बिगड़ रहा है। हालांकि कर्मचारी संगठनों की मांग के इधर सरकार को भी कर्मचारियों की संख्या कम होने की चिंता सता रही है और यही वजह है कि पिछले 1 साल में सरकार ने शिक्षा और पुलिस जैसे विभागों में सीधी भर्ती का रास्ता खुला है लेकिन अभी भी कई सरकारी विभागों में सीधी भर्ती पर रोक लगी हुई है आने वाले दिनों में सरकार इन विभागों के लिए भी सीधी भर्ती का रास्ता खोल सकती है।
    25 साल पहले थे सवा 5 लाख सरकारी कर्मचारी
    कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह का कहना है कि कई 25 साल पहले 2001 में पूरे प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या सवा 5 लाख से भी ज्यादा थी। लेकिन इसके बाद सरकार ने लंबे समय से सीधी भारतीयों पर रोक लगा दी। इसका असर यह हुआ कि कर्मचारी रिटायर तो होते चले गए लेकिन उनके स्थान पर नए कर्मचारी नियुक्त नहीं हो पाए जिसकी वजह से प्रेस के 80 फीसदी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों क स्वीकृत पदों के अनुरूप स्टाफ की कमी है।

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