
- 30.2 प्रतिशत तक बढ़ गई आवश्यकता
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में खेती के लिए उर्वरकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। तीन साल में कुल मांग 66.36 लाख मीट्रिक टन से बढक़र 86.42 लाख मीट्रिक टन हो गई। यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीकेएस और एसएसपी जैसे पांच प्रमुख उर्वरकों की जरूरत में यह वृद्धि राज्य में 30.2 प्रतिशत तक बढक़र सामने आई है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 2023-24 में जहां पांच प्रमुख उर्वरकों की कुल आवश्यकता 66.36 लाख मीट्रिक टन थी, वहीं 2025-26 में यह बढक़र 86.42 लाख मीट्रिक टन हो गई। इस अवधि में उपलब्धता भी 81.46 लाख से बढक़र 92.34 लाख मीट्रिक टन हुई, लेकिन मांग और उपलब्धता के बीच अतिरिक्त अंतर लगातार कम हुआ है। इसमें खास बात यह है कि इन तीन वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव एनपीकेएस में आया है। इसकी आवश्यकता 2023-24 में जहां 5.40 लाख टन थी, वह अब 206 प्रतिशत बढक़र 2025-26 में 16.50 लाख मिट्रिक टन हो गई।
यूरिया में सबसे ज्यादा खपत
यूरिया की आवश्यकता 2023-24 में 33.46 लाख मीट्रिक टन थी, जो 2025-26 में बढक़र 40.42 लाख मिट्रिक टन हो गई। इसी अवधि में उपलब्धता 41.73 लाख से बढक़र 47.16 लाख मिट्रिक टन हो गई। हालांकि तीन साल में यूरिया की डीबीटी (डॉयरेक्ट बेनीफिट) बिक्री में करीब 23.45 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है।
जैविक खाद उत्पादन में भी इजाफा: जैविक खाद उत्पादन 2023-24 में 13.88 लाख मीट्रिक टन था, जबकि उपलब्ध आंकड़ों में 2025-26 के लिए 17.10 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज है। इस आधार पर करीब 23त्न की वृद्धि दिखाई देती है। हालांकि दिए गए आंकड़ों में 2025-26 के लिए 14.72 लाख टन का एक अन्य आंकड़ा भी है, इसलिए इसकी अवधि/श्रेणी विभागीय स्तर पर स्पष्ट करना जरूरी होगा।
डीएपी में मांग बढ़ी, लेकिन उपलब्धता घटी
डीएपी की मांग और उपलब्धता का आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंता वाला रहा है। 2023-24 में 14.22 लाख मीट्रिक टन की आवश्यकता के मुकाबले 17.81 लाख टन उपलब्ध था। लेकिन 2024-25 में आवश्यकता 16.57 लाख टन पहुंच गई, जबकि उपलब्धता घटकर 12.70 लाख टन रह गई। 2025-26 में भी 15 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले उपलब्धता केवल 13.09 लाख टन रही। यानी दोनों वर्षों में उपलब्धता मांग से कम रही है।
