कमजोर विस क्षेत्रों में जन-विश्वास जीतने में जुटी भाजपा

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  • 15 सीटों में से 12 पर कांग्रेस का कब्जा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। प्रदूश में बीते 7 अगस्त से प्रारंभ हुआ मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान वैसे तो सभी जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर पर चलाया जा रहा है, लेकिन इसमें मुख्यमंत्री उन्हीं जिलों में पहुंच रहे हैं, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा पर कांग्रेस हाबी रही है। अभियान के जरिए इन क्षेत्रों में सरकार और भाजपा संगठन जनता से अपना खोया जन विश्वास वापस लेने की कवायद में जुटा हुआ है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने 7 अगस्त 2026 से 8 जनवरी 2027 तक हर शुक्रवार को नो मीटिंग डे घोषित कर जन विश्वास अभियान चलाने का एलान किया था। तब से अब तक मुख्यमंत्री 3 जिला मुख्यालयों में अभियान के तहत पहुंच चुके हैं और वहां पर जनता से जहां सीधे संवाद किया है, तो वहीं लापरवाही या अनियमितता करने वाले अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन भी लिया है। इन सब में गौर करने वाली बात यह है कि सीएम ने अपने अभियान के लिए अब तक जिन जिलों को चुना है, वहां पिछले विधानसभा और निकाय चुनावों में भाजपा को करारी शिकस्त मिल चुकी है। इन जिलों की 15 विधानसभा सीटों में से 12 पर कांग्रेस का विधायक है, जबकि 3 पर ही भाजपा को जीत मिली थी। हालांकि लोकसभा 2024 के चुनाव के दौरान और बाद में कुछ विधानसभा क्षेत्रों और निकायों की राजनीतिक स्थिति में बदलाव हुआ है, लेकिन वहां जनता ने चुनावों में भाजपा के स्थान पर कांग्रेस को ज्यादा बहुमत दिया था। भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस अभियान के जरिए संगठन और सरकार इन क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। इसलिए सीएम से संवाद के लिए जिलेभर के लोगों को चिन्हित किया जाता है और उनकी मौके पर ही समस्याओं को दूर कर यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि भाजपा और उसकी सरकार जनता की हितैषी हैं। इतना ही नहीं इन क्षेत्रों में कराए गए विकास कार्यों का लोकार्पण या भूमिपूजन में भी सीएम या उनके कोई वरिष्ठ मंत्री की मौजूदगी रहती है।
आज बालाघाट में होगा आयोजन
मुख्यमंत्री 29 अगस्त को बालाघाट के लांजी में जन विश्वास अभियान के तहत जनता से संवाद करेंगे व समस्याओं का समाधान होगा। बालाघाट भी पिछले विस चुनाव में भाजपा के लिए शुभ साबित नहीं हुआ था। यहां की 6 सीटों में से 4 पर कांग्रेस का कब्जा है। इनमें से बालाघाट, परसवाड़ा, वारासिवनी और बैहर सीट से कांग्रेस के विधायक हैं, जबकि लांजी और कटंगी में भाजपा ने जीत हासिल की थी। यानि कि यह जिला भी विधानसभा चुनाव की दृष्टि से भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है।
बीते विधानसभा चुनावों की स्थिति
मुख्यमंत्री ने जन विश्वास अभियान की शुरूआत छिंदवाड़ा से की थी, उसके बाद वे बड़वानी और फिर टीकमगढ़ जिला मुख्यालय पहुंचे थे। अगर इन तीनों जिलों में बीते विधानसभा और निकाय चुनावों पर नजर डाली जाए, तो वहां कांग्रेस भाजपा से काफी आगे रही हैं।
छिंदवाड़ा: मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का पहला पड़ाव छिंदवाड़ा रहा। यहां की सभी 7 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन बाद में अमरवाड़ा विधायक ने भाजपा का थामन थाम कर उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे इस जिले की 6 सीटों पर अभी भी कांग्रेस के जनप्रतिनिधि है। यदि यहां निकायों पर नजर डाली जाए, तो वर्ष 2022 में हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस ने छिंदवाड़ा की निकायों में एकतरफा जीत हासिल की थी। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले छिंदवाड़ा नगर निगम के मेयर विक्रम अहाके ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी तरह निकाय चुनावों में चांद, न्यूटन खिली, लोधीखेड़ा, बडक़ुही और परासिया में कांग्रेस की परिषद जीती थी। सौंसर, जुन्नारदेव, अमरवाड़ा और दमुआ की स्थानीय परिषद में भाजपा ने बढ़त बनाई थी। यानि कि निकाय चुनाव में उस दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी।
बड़वानी: सीएम का दूसरा शुक्रवार बड़वानी में बीता, जहां पर 4 विधानसभा सीटों में से 3 पर कांग्रेस का कब्जा है। यहां की पानसेमल विधानसभा से भाजपा के विधायक हैं, जबकि बड़वानी, राजपुर और सेंधवा से वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। हालांकि निकाय चुनावों में यहां से भाजपा के लिए संतोषप्रद परिणाम मिले थे।

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