
- यूजर फीस के नए प्रावधान से बढ़ेगा सफर का खर्च, टोल से अलग होगी वसूली
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में स्टेट हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों और माल परिवहन करने वालों की जेब पर आने वाले दिनों में अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राज्य सरकार ने स्टेट हाईवे के इस्तेमाल पर यूजर फीस वसूलने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके लिए मध्यप्रदेश स्टेट हाईवे एक्ट में संशोधन किया गया है और मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 का गजट नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। नए प्रावधान लागू होने के बाद सरकार किसी भी स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से को यूजर फीस के दायरे में ला सकेगी। खास बात यह है कि यह शुल्क मौजूदा टोल और वैट से अलग होगा। ऐसे में सडक़ से गुजरने वाले वाहनों के लिए परिवहन लागत बढऩे की संभावना है। संशोधित कानून की धारा 8-ए के तहत राज्य सरकार स्टेट हाईवे या उसके किसी हिस्से के इस्तेमाल से जुड़ी सेवाओं के लिए निर्धारित दरों पर यूजर फीस लगा सकेगी। सरकार सडक़ के विकास, रखरखाव, प्रबंधन और संचालन के लिए किसी एजेंसी या निजी संस्था के साथ समझौता भी कर सकेगी। समझौते के तहत संबंधित एजेंसी या व्यक्ति को यूजर फीस वसूलने और तय शर्तों के अनुसार उसका हिस्सा अपने पास रखने का अधिकार दिया जा सकता है। यानी भविष्य में किसी स्टेट हाईवे पर वाहन चालक को मौजूदा टोल के अलावा यूजर फीस भी देनी पड़ सकती है। हालांकि शुल्क किन सडक़ों पर और कितनी दर से लगाया जाएगा, यह सरकार के आगामी निर्णयों पर निर्भर करेगा।
फीस तय करने के कई आधार
यूजर फीस की दर मनमाने तरीके से तय नहीं होगी। इसके लिए सडक़ निर्माण और रखरखाव की लागत, प्रबंधन एवं संचालन खर्च, निवेश की गई पूंजी पर ब्याज, उचित रिटर्न, सडक़ पर वाहनों की संख्या और समझौते की अवधि जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। सरकार का तर्क है कि स्टेट हाईवे के विकास और रखरखाव में लगातार बढ़ रहे निवेश को देखते हुए इसके लिए अतिरिक्त और व्यवस्थित राजस्व स्रोत जरूरी है।
12 हजार किमी नेटवर्क पर नजर
मध्यप्रदेश में 12 हजार किमी से ज्यादा लंबा स्टेट हाईवे नेटवर्क है। नए प्रावधान के तहत इस नेटवर्क में शामिल किसी भी हाईवे या उसके हिस्से को यूजर फीस के दायरे में लाया जा सकता है। सरकार शुल्क से मिलने वाली राशि के लिए अलग फंड बनाने की दिशा में भी काम कर सकती है। इस फंड का इस्तेमाल सडक़ों के विकास और रखरखाव में किया जाएगा। इससे सरकार को उम्मीद है कि इन कामों के लिए सामान्य बजट पर निर्भरता कुछ कम होगी।
पहले से ज्यादा है पेट्रोल-डीजल पर टैक्स
यूजर फीस लागू होने की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल पर वैट भी अपेक्षाकृत अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पेट्रोल पर 26.70 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 16.70 रुपए प्रति लीटर वैट लिया जाता है। ऐसे में स्टेट हाईवे पर नया शुल्क लागू होने पर नियमित रूप से इन सडक़ों का इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों के साथ ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर माल ढुलाई और परिवहन लागत पर भी पडऩे की आशंका है।
टोल कलेक्शन में भी मप्र आगे
मध्यप्रदेश पहले से ही हाईवे टोल से बड़ी राशि जुटाने वाले राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश ने नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे से 4,343.552 करोड़ रुपए का टोल कलेक्शन किया। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर रहा। चार साल में प्रदेश के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे से होने वाले टोल कलेक्शन में भी बड़ा इजाफा हुआ है। वर्ष 2021-22 में जहां यह राशि 2,472.96 करोड़ रुपए थी, वहीं 2025-26 में बढकऱ 4,343.552 करोड़ रुपए हो गई। महाराष्ट्र 7,053.711 करोड़ रुपए के साथ टोल कलेक्शन में देश में सबसे आगे रहा।
सरकार के लिए नया राजस्व मॉडल: सरकार की नजर अब स्टेट हाईवे से होने वाली आय को और व्यवस्थित करने पर है। संशोधन के जरिए यूजर फीस वसूली का स्पष्ट कानूनी आधार तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे सडक़ निर्माण, रखरखाव और संचालन के लिए स्थायी राजस्व स्रोत तैयार होगा। हालांकि आम वाहन चालकों के लिए सवाल यह है कि पहले से टोल और ईंधन पर टैक्स देने के बाद नए यूजर फीस का वास्तविक बोझ कितना होगा। शुल्क की दरें और किन स्टेट हाईवे को इसके दायरे में लाया जाएगा, इस पर सरकार के अगले फैसले से तस्वीर साफ होगी।
