
- सीबीआई जैसे विजिलेंस की मांग…
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया के कथित भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर हवाला के दो करोड़ 96 लाख रुपये की बंदरबाट की आरोपित डीएसपी पूजा पांडे या फिर पुलिस के अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों का मामला, पुलिस के विजिलेंस सिस्टम से पुलिसकर्मियों द्वारा की जा रही गड़बड़ी की जानकारी नहीं मिल पा रही है। इसकी बड़ी वजह पुलिस के विजिलेंस सेल में पर्याप्त पुलिसकर्मियों का न होना भी है। पुलिस विजिलेंस में कुल 39 का बल स्वीकृत है, जिसमें कार्यरत मात्र 15 हैं। ऐसे में एक जिले में औसतन एक भी नहीं है। पुलिसिंग के जानकारों का भी कहना है कि जिस तरह से अपराध बढ़ा और अपराध का तरीका बदला है, उसी दृष्टि से विजिलेंस सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिसकर्मियों द्वारा भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले पिछले दो वर्षों में सामने आ चुके हैं। भोपाल में वर्ष 2025 में ऐशबाग थाने के चार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध पांच लाख रुपये मांगने के आरोप में एफआईआर पंजीबद्ध की गई थी। इंदौर में भी मामले सामने आए हैं। लेन-देन का ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया में बहुप्रसारित होने के बाद पुलिस सक्रिय हो रही है या फिर पीडि़त की शिकायत के बाद। पुलिस का विजिलेंस सिस्टम न के बराबर है। एक स्पेशल डीजी के अधीन इसमें एक-एक डीआईजी और एआईजी सहित अन्य स्टाफ है। इसमें 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। उधर, जिलों में पुलिस अधीक्षकों का तंत्र भी फेल है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों से यह भी साबित होता है, जिलों में पुलिस अधीक्षकों को भी अपने निचले स्टाफ की कारगुजारियों की जानकारी नहीं रहती है। पुलिस में विजिलेंस को बहुत अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। सीबीआई जैसा सिस्टम होना चाहिए। सीबीआई खुद अपने लोगों पर नजर रखती है, पकड़ती है। यही कारण है वहां कोई भ्रष्टाचार में शामिल होने से डरता है। मप्र पुलिस में जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामले बढ़े हैं, गृह विभाग और सरकार को बहुत अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दर्ज हैं अपराध के मामले
दिसंबर 2025 की स्थिति में प्रदेश में पुलिस के अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध अपराध के 329 प्रकरण पंजीबद्ध थे। इनमें अधिकतर मारपीट और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले थे। 259 मामलों में पहले ही आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि 61 में जांच लंबित थी। इसमें सर्वाधिक 48 अपराध भोपाल में दर्ज हैं, दूसरे नंबर पर ग्वालियर में 27 मामले पंजीबद्ध हैं।
