
- शिक्षक संगठन हुए सक्रिय
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारियों के बीच तमिलनाडु सरकार के संकल्प ने मध्यप्रदेश के शिक्षकों की आंखों में चमक बढ़ा दी है। साथ ही वर्ष 2010 के पहले नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा के झंझट से बचाने का रास्ता भी मिल गया है। इसकी जानकारी मिलते ही शिक्षक संगठनों ने तमिलनाडु की तर्ज पर 2010 के पहले के शिक्षकों को टीईटी से छूट देने मध्यप्रदेश सरकार से भी संकल्प लाने की मांग तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार तमिलनाडु विधानसभा में सरकार ने मंगलवार को एक संकल्प पारित किया है, जिसमें अगस्त 2010 के पहले भर्ती हुए शिक्षकों को शिक्षा के अधिकार कानून की धारा 23 के तहत टीईटी से छूट दिलाने का प्रस्ताव दिया गया है। विधानसभा से पारित इस संकल्प को केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है। साथ ही केंद्र सरकार से आरटीई की धारा 23 में संशोधन की मांग की गई है। इस संकल्प की जानकारी मिलते ही मध्यप्रदेश के शिक्षकों में उम्मीद जाग गई है। शासकीय शिक्षक संगठन ने तमिलनाडु सरकार की तर्ज पर मध्यप्रदेश से भी शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाने के लिए विधानसभा से संकल्प पारित कराने की मांग स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदयप्रताप सिंह से की है। संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल का कहना है जब तमिलनाडु सरकार वहां के शिक्षकों के हित में यह कदम उठा सकती है तो मध्यप्रदेश के शिक्षकों पर बेवजह पात्रता परीक्षा क्यों लादी जाए।
टीईटी की तैयारियां हुईं तेज
लोक शिक्षण संचालनालय ने टीईटी की तैयारी तेज कर दी है। परीक्षा की जिम्मेदारी कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) को सौंपी गई है। ईएसबी में 12 अक्टूबर से परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके आवेदन इसी माह से भरे जाना है। टीईटी में फेल होने वाले शिक्षकों की पदोन्नति, क्रमोन्नति सहित नौकरी पर भी संकट आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए देश भर के शिक्षक संघर्षरत हैं।
