
- रोकथाम के दावों के बीच… 2026 में आंकड़ा 39 हजार पार
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सजा से लेकर अर्थदंड तक के प्रविधान करने के बाद भी मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। एक अप्रैल से मई 2026 के बीच देश में सर्वाधिक 36 हजार घटनाएं प्रदेश में दर्ज की गईं। इसे रोकने के लिए जन जागरूकता से लेकर कई तरह के प्रविधान किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। इसका नुकसान भूमि के पोषक तत्वों के साथ पर्यावरण को हो रहा है। भारत सरकार से लेकर चिंता जता चुकी है। मध्य प्रदेश में पराली जलाने की इन बढ़ी घटनाओं पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ कृषि मंत्रालय ने भी मध्य प्रदेश को इस मामले पर चेताया है। साथ ही रोकथाम के जरिए जरूरी उपाय करने को कहा है। हाल ही में वायु प्रदूषण को लेकर वायु गुणवत्ता आयोग की बैठक में भी मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं पर चिंता जताई गई है।अब तक चार हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च भी कर चुकी है। वैसे तो अब तक सिर्फ धान की पराली जलने की घटनाएं सामने आती है लेकिन अब गेंहू की पराली जलाने का भी चलन इन राज्यों में बढ़ा है।
जागरूकता के बाद भी बढ़े मामले, पुलिस प्रकरण दर्ज
जबकि, कृषि के साथ राजस्व, पर्यावरण विभाग लगातार किसानों को चेता रहे हैं कि खेत साफ करने के चक्कर में आप भूमि से लेकर पर्यावरण का बड़ा नुकसान कर रहे हैं। जागरूकता के कई कार्यक्रम चलाने के बाद पराली जलाने के मामले कम होने के स्थान पर बढ़ गए। जबकि, सागर सहित अन्य जिलों में पराली जलाने वाले किसानों के विरुद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराए गए। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पराली प्रबंधन के लिए एक्स्ट्रा रीपर, रीपर, रीपर कंबाइंडर, एक्स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, सुपर सीडर, मल्चर, बेलर आदि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है।
अप्रैल से मई 2026 के आंकड़े चिंताजनक
प्रदेश में अकेले अप्रैल से मई 2026 को ही देखें तो आंकड़े चिंता में डालने वाले नजर आते हैं। खरीफ फसल की बोवनी के लिए खेत साफ करने को दो माह में किसानों ने पराली खूब जलाई। अकेले विदिशा जिले में ही 4,465 मामले रिकार्ड हुए। चिंता की बात यह है कि यह ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है। रायसेन में 3,205, सिवनी 3,157, उज्जैन 2,444 घटनाएं रिकार्ड हुईं। छिंदवाड़ा में भी अब पराली जलाने के मामले बढ़ रहे हैं। यहां 2025 में 714 मामले सामने आए थे, जो 2026 में बढक़र 1,925 पहुंच गए। नर्मदापुरम, गुना, सागर सहित अन्य जिले हैं, जहां खरीफ फसल की बोवनी के लिए बी की फसल कटने के बाद आग लगाई जा रही है।
केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता आयोग की बढ़ी चिंता
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस बार सेटेलाइट की मदद से धान के साथ गेंहू की पराली जलाने की घटनाओं का भी अध्ययन कराया था। जिसमें पाया था कि सितंबर से नवंबर 2025 के दौरान धान की पराली जलाने की छह राज्यों में कुल घटनाएं 33028 रिपोर्ट हुई थी। जिसमें आधी से अधिक यानी 17067 घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में रिपोर्ट हुई थी। वहीं एक अप्रैल से 13 मई 2026 के बीच गेंहू की पराली जलाने को लेकर पांच राज्यों में कराए गए अध्ययन में कुल 63195 घटनाएं रिपोर्ट हुई।
