
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राजधानी में विकास परियोजनाओं के लिए 2200 पेड़ काटे गए, इसके एवज में 1.35 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि जमा कराई गई और अब 96,355 पौधे लगाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि दशकों में तैयार हुए इन पेड़ों की जगह लगाए गए नन्हे पौधे कब तक वही छाया, ऑक्सीजन और पर्यावरणीय सुरक्षा दे पाएंगे? नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में डा. सुभाष सी. पांडेय की याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सामने आए इस हरित हिसाब ने विकास और पर्यावरण के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है। एनजीटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिर्फ पौधारोपण तक सीमित रहने के बजाय पेड़ों की कटाई, उनके जीवित रहने, हरित पट्टियों पर कब्जे और शहर के भविष्य के हरित क्षेत्र की निगरानी के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।
एयरपोर्ट से कलियासोत तक लगाए 96,355 पौधे
नगर निगम की रिपोर्ट में शहर के अलग-अलग हिस्सों में 96,355 पौधे लगाने का दावा किया गया है। इनमें एयरपोर्ट के तीन स्थानों पर 58,500, आदमपुर छावनी में 10,820, कलियासोत डैम में 10,630, बीएचईएल बर्ड सेंक्चुरी में 6200, बरखेड़ा पठानी में 1950 और अन्य पाकों, एसटीपी, सडक़ वर्ज और चौराहों पर लगाए गए पौधे शामिल हैं।
एनजीटी ने कहा-15 साल तक हो निगरानी
एनजीटी ने क्षतिपूरक पौधारोपण की निगरानी के लिए वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों वाली समिति बनाने और 18 साल तक पौधों के संरक्षण एवं जीवित रहने की निगरानी के निर्देश दिए हैं। भोपाल नगर निगम क्षेत्र की हाई-रिजोल्यूशन जीआईएस मैपिंग और वृक्षराणना कराने को कहा गया है, ताकि हर पेड़, उसकी प्रजाति, हरित पट्टी, खुले भू-भाग और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
