- सांदीपनि विद्यालय महात्मा गांधी की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला का हुआ चयन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
शहर के सांदीपनि विद्यालय महात्मा गांधी की उच्च माध्यमिक शिक्षक डा. अर्चना शुक्ला ने विज्ञान की पढ़ाई को किताबों से निकालकर प्रकृति और समाज से जोड़ने का प्रयास किया। विद्यार्थियों के साथ उन्होंने गौरैया संरक्षण, पेड़-पौधों की पहचान और बीज संरक्षण जैसे प्रोजेक्ट तैयार किए। गौरैया संरक्षण के लिए विकसित उनके वैज्ञानिक मॉडल स्पैरो हाउस को देश में सराहना मिल रही है। इसी नवाचार और विद्यार्थियों को शोध व परियोजना आधारित शिक्षा से जोड़ने के लिए उनका चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए हुआ है। उनका सम्मान नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पांच. सितंबर शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मानित करेंगी। नेपाल में कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस-2026 में उन्होंने छात्र-नेतृत्व वाले संरक्षण माडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया है।
सवाल: आपके शिक्षण की सबसे खास बात क्या है?: मेरा प्रयास रहता है कि बच्चे केवल किताब पढक़र विज्ञान न सीखें, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझें और उनके समाधान खोजें। इसी उद्देश्य से प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग को अपनाया है। पेड़ों का क्यूआर कोडिंग, स्पैरो कंजर्वेशन, सेव ए सीड-सेव ए ट्री और प्लांट इमोशन जैसे प्रोजेक्ट विद्यार्थियों ने तैयार किए हैं।
सवाल: गौरैया संरक्षण का विचार आपके मन में कैसे आया?: विद्यार्थियों के साथ गौरैया के जीवन और उनके आवास का अध्ययन करते हुए हमने कई वर्षों तक प्रयोग और अवलोकन किए। इसके आधार पर गौरैया घरों के मॉडल विकसित किए। इन मॉडलों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है। अब मध्य प्रदेश के साथ देश के दूसरे राज्यों से भी इनके बारे में रुचि और मांग सामने आ रही है।
विद्यार्थियों को स्कूलों में इससे क्या सीखने को मिला?
बच्चों ने सीखा कि विज्ञान केवल परीक्षा में अंक हासिल करने का विषय नहीं है। इसके माध्यम से प्रकृति और समाज की समस्याओं के समाधान खोजे जा सकते हैं। प्रोजेक्ट के दौरान उनमें वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, नेतृत्व और समस्या समाधान की क्षमता विकसित हुई।
क्या आपके विद्यार्थियों ने इन प्रोजेक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रस्तुत किया?: हां। विद्यार्थियों ने अपने इन प्रोजेक्ट कार्य को जोषान के अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। मैंने भी विद्यार्थियों के साथ किए गए कार्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा किया, जहां 42 देशों के विद्वानों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। नेपाल की कंजर्वेशन एशिया कांग्रेस-2026 में भी छात्र-नेतृत्व वाले संस्क्षण माडल को प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों की आगे की उपलब्धियों को आप किस तरह देखती हैं?: मेरे लिए विद्यार्थियों की सफलता केवल परीक्षा परिणाम नहीं है। मेरे अनेक विद्यार्थी जेईई और नीट जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफल हुए हैं। यह देखकर लगता है कि शिक्षा का उद्देश्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शिक्षक प्रशिक्षण में भी आपकी भूमिका है?: मैं मध्य प्रदेश की स्टेट रिसोर्स पर्सन के रूप में विज्ञान और प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग के क्षेत्र में शिक्षकों को प्रशिक्षण देती हूं। प्रदेश के शिक्षकों के साथ-साथ 10 देशों से आए शिक्षकों को भी ट्रेनिंग देने का अवसर मिला है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के चयन को आप किस रूप में देखती हैं?: यह सम्मान मेरे साथ काम करने वाले विद्यार्थियों, सहकर्मियों और विद्यालय परिवार के प्रयासों का भी सम्मान है। मेरा उद्देश्य आगे भी बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता, संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना रहेगा।
