नौ साल बाद कैंपस की सियासत में एंट्री की तैयारी

  • कांग्रेस ने 13 नेताओं को मैदान में उतारा

गौरव चौहान
मध्यप्रदेश के कॉलेजों में नौ साल बाद छात्र संघ चुनाव की आहट के साथ कैंपस की राजनीति फिर गरमाने लगी है। हाईकोर्ट के सितंबर में चुनाव कराने के निर्देश के बाद कांग्रेस ने इसे युवाओं और खासकर जेन-जी के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के अवसर के तौर पर लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले ही प्रदेश के 13 पूर्व छात्र नेताओं को अलग-अलग जिलों की कमान सौंप दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जिला प्रभारियों की सूची जारी करते हुए नेताओं को स्थानीय स्तर पर छात्र संगठनों से समन्वय, संभावित उम्मीदवारों की पहचान और चुनावी रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ है कि कांग्रेस अब सरकार की ओर से चुनाव कार्यक्रम जारी होने का इंतजार करने के बजाय कैंपस में संगठन खड़ा करने की तैयारी में जुट गई है।
कांग्रेस ने प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए हैं। भोपाल में प्रकाश चौकसे, इंदौर में अमन बजाज और ग्वालियर में हेवरन कसाना को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं बाकी नेताओं को संभाग और जिलों के समूह की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विंध्य के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर में मंजुल त्रिपाठी, महाकौशल के जबलपुर सहित आठ जिलों में विजय रजक, उज्जैन संभाग के सात जिलों में डॉ. विजय बोडाना और मालवा-निमाड़ के सात जिलों में दीपक डंडीर जिम्मेदारी संभालेंगे। इसी तरह शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और दतिया में सौरभ यादव, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल में मयूर जायसवाल, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा में अर्पित उपाध्याय तथा भिंड, मुरैना और श्योपुर में सचिन द्विवेदी को प्रभारी बनाया गया है।
सरकार की तारीख का इंतजार, संगठन ने शुरू किया काम
कॉलेजों में छात्र संघ चुनाव वर्ष 2017 के बाद से बंद हैं। हाईकोर्ट ने चुनाव कराने का रास्ता साफ करते हुए सितंबर में चुनाव कराने के लिए अकादमिक कैलेंडर तैयार करने को कहा है। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक चुनाव की तारीख और पूरी प्रक्रिया घोषित नहीं की है। सबसे बड़ा सवाल चुनाव की प्रणाली को लेकर है। छात्र संगठन प्रत्यक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं और इसे लेकर प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। अंतिम बार 2017 में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर चुनाव हुए थे। समिति ने कम खर्च और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त चुनाव की व्यवस्था की सिफारिश की थी।
जेन-जी को साधने की रणनीति
कांग्रेस की इस सक्रियता को केवल छात्र संघ चुनाव की तैयारी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पार्टी पिछले कुछ समय से युवाओं और जेन-जी के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में कॉलेज कैंपस उसके लिए सीधे युवा वोटर और नए राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का बड़ा मंच बन सकते हैं। करीब एक दशक बाद होने वाले चुनावों में छात्र मुद्दे, फीस, रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा और कैंपस सुविधाएं प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। कांग्रेस की चुनौती पुराने छात्र संगठन नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने और उसे चुनावी ताकत में बदलने की होगी।
भोपाल में राहुल गांधी के समर्थन में धरना
इधर, जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और कथित पैलेट गन इस्तेमाल के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भोपाल में भी विरोध प्रदर्शन किया। भोपाल जिला कांग्रेस के बैनर तले कार्यकर्ता रोशनपुरा चौराहे पर एकत्रित हुए और मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलाने और छात्रों के घायल होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने का विरोध किया। प्रदर्शन में भोपाल कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, दीपचंद यादव, अभिनव बरौलिया, सोनू भाभा, अशोक मारण, टीआर गहलोत, कुलदीप सिंह दीपू तोमर, अजय श्रीवास्तव, सुशील प्रजापति, सोनू तोमर, प्रवीण धोलपुरे और राहुल राठौर सहित कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Related Articles