दोषी को फांसी से ही दी जाएगी सजा-ए-मौत: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने देश में मृत्युदंड देने के लिए फांसी के बजाय किसी कम दर्दनाक विकल्प-जैसे जहरीला इंजेक्शन या गोली मारने को अपनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने फैसला सुनाते हुए साफ किया कि भारत में सजा-ए-मौत के लिए फांसी की प्रक्रिया ही लागू रहेगी। अदालत ने इस विषय पर पूर्व में दिए गए तीन प्रमुख फैसलों को बड़ी बेंच के पास भेजने की याचिकाकर्ता की मांग को भी अनुचित मानते हुए खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार चाहे तो मौत की सजा के वैकल्पिक तरीकों की व्यापक समीक्षा करने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर सकती है। शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी को मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर इस जनहित याचिका में फांसी की प्रक्रिया को अत्यधिक दर्दनाक, क्रूर और अमानवीय बताया था।  फांसी के बाद व्यक्ति को मृत घोषित करने में लगभग 40 मिनट लगते हैं, जबकि जहरीला इंजेक्शन या गोली मारने जैसे विकल्पों में मौत प्रक्रिया 5 मिनट में पूरी हो जाती है।

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