
- प्रतिमा देवी की बेटी शिवांगिनी के दावे पर तीनों बुआओं को आपत्ति
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े पुराने विवाद में सोमवार को जिला कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नया मोड़ सामने आया। संपत्ति में हिस्सा मांगने के लिए प्रतिमा देवी की ओर से किए गए दावे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की तीनों बुआओं-यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे और ऊषा राजे ने आपत्ति जताई है। तीनों की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि संपत्ति के संबंध में पहले ही सहमति और लिखित समझौता हो चुका था। ऐसे में अब दोबारा हिस्सा मांगने का दावा किस आधार पर किया गया है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान शिवांगिनी राजे अपने पति कौस्तुभ सिंह राणा के साथ जिला कोर्ट पहुंचीं। शिवांगिनी, प्रतिमा देवी की बेटी और पद्मावती राजे की नातिन हैं। उन्होंने अपनी नानी पद्मावती राजे के हिस्से से जुड़ी संपत्ति में अधिकार को लेकर अदालत में आवेदन दिया है। इस आवेदन के बाद सिंधिया परिवार की संपत्ति से जुड़ा पुराना विवाद एक बार फिर अदालत में पहुंच गया है। शिवांगिनी के आवेदन का यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे और ऊषा राजे की ओर से विरोध किया गया। तीनों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत शर्मा ने अदालत में पक्ष रखते हुए पुराने दस्तावेज और कथित समझौते का हवाला दिया। दोनों पक्षों की ओर से दस्तावेजों और संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर अलग-अलग दलीलें रखी गईं।
सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुराने लिखित समझौते को लेकर उठा। तीनों बुआओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रशांत शर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि प्रतिमा देवी की ओर से पहले संपत्ति में हिस्सा नहीं लेने की बात लिखित रूप में कही गई थी। इसी कथित सहमति को आधार बनाकर वर्तमान दावे पर आपत्ति जताई गई। उनकी ओर से शिवांगिनी पक्ष के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 379 के तहत कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस पूरे विवाद में पुराने दस्तावेज की वास्तविक प्रकृति और उसकी कानूनी वैधता आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर शिवांगिनी राजे और उनके पति कौस्तुभ सिंह राणा का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी पुराने समझौते की जानकारी नहीं है। शिवांगिनी की ओर से यह दावा किया गया कि उस समय उनकी मां प्रतिमा देवी अमेरिका में थीं और उनके पास एक खाली कागज भेजा गया था। उनसे उस कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था। इस तरह मामले में अब मुख्य विवाद केवल संपत्ति के हिस्से तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित पुराने दस्तावेज की परिस्थितियों और उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर भी है।
नानी पद्मावती राजे के हिस्से से जुड़ा दावा
शिवांगिनी राजे का दावा पद्मावती राजे के हिस्से की संपत्ति से जुड़ा है। पद्मावती राजे सिंधिया परिवार की बड़ी बेटियों में शामिल थीं। उनका विवाह त्रिपुरा के राजपरिवार में हुआ था। कम उम्र में उनका निधन हो गया था। उनकी बेटियों में प्रतिमा देवी और कनिका देवी शामिल हैं। यही पारिवारिक उत्तराधिकार इस संपत्ति विवाद को महत्वपूर्ण बनाता है। पद्मावती राजे के हिस्से से जुड़े अधिकार और उनके उत्तराधिकारियों के दावे को लेकर अदालत में दस्तावेजों और कानूनी स्थिति की जांच का मुद्दा सामने आया है। शिवांगिनी अपनी मां प्रतिमा देवी के माध्यम से नानी पद्मावती राजे के हिस्से पर दावा कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर परिवार की अन्य सदस्याओं की ओर से इस दावे का विरोध किया जा रहा है। ऐसे में अदालत के सामने अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण होगा कि पद्मावती राजे के हिस्से पर उनके उत्तराधिकारियों का दावा किस सीमा तक बनता है और पहले हुए कथित समझौते का इस पर क्या प्रभाव पड़ता है।
दोनों पक्षों के दावों में दस्तावेज अहम
मामले में अब पुराने दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं। एक पक्ष का कहना है कि संपत्ति को लेकर पहले ही सहमति हो चुकी थी और प्रतिमा देवी ने हिस्सा नहीं लेने पर सहमति जताई थी। वहीं दूसरे पक्ष का दावा है कि ऐसे किसी समझौते की उन्हें जानकारी नहीं है और जिस दस्तावेज पर हस्ताक्षर की बात कही जा रही है, उसकी परिस्थितियां भी स्पष्ट नहीं हैं। अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान कथित राजीनामा, पुराने दस्तावेज और उनके आधार पर किए जा रहे दावों की कानूनी स्थिति पर विस्तार से बहस होने की संभावना है। यदि दस्तावेज की वैधता या हस्ताक्षर की परिस्थितियों को लेकर विवाद कायम रहता है, तो अदालत के सामने इन बिंदुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
