अनाथ बच्चों का 10वीं-12वीं का परीक्षा-नामांकन शुल्क माफ

  • माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र देने पर ही मिलेगी पूरी छूट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
जिन विद्यार्थियों के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है उनसे माध्यमिक शिक्षा मंडल कोई शुल्क नहीं लेगा। माशिमं ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया कि कई बार देखा गया है कि शुल्क के अभाव में ऐसे कई बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। इसलिए बोर्ड ने तय किया है कि ऐसे बच्चों से नामांकन और परीक्षा दोनों तरह के शुल्क नहीं लिए जाएंगे। नए आदेश के मुताबिक जिन बच्चों के माता-पिता दोनों का निधन हो गया है उन्हें सत्र 2026-27 से मंडल की परीक्षाओं और नामांकन के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। आदेश में लिखा है कि ऐसे विद्यार्थी जो माता-पिता की मृत्यु के बाद किसी रिश्तेदार के आश्रय में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं अथवा शासन द्वारा संचालित या मान्यता प्राप्त अनाथालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें शुल्क में पूरी छूट दी जाएगी। यह सुविधा माशिमं की ओर से आयोजित 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा, द्वितीय बोर्ड परीक्षा, डीएलएड जैसी परीक्षाओं और नामांकन पर लागू होगी।
पेश करने होंगे यह दस्तावेज
शुल्क माफी का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को बोर्ड का नामांकन अथवा परीक्षा फॉर्म भरते समय माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही जिस रिश्तेदार, सरकारी अनाथालय या मान्यता प्राप्त संस्था में विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहा है, वहां से संबंधित प्रमाण-पत्र भी देना अनिवार्य होगा। तय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर विद्यार्थी शुल्क छूट का पात्र नहीं माना जाएगा।  
परीक्षा शुल्क 1500 और नामांकन 500 रुपए
माशिमं ने इस बार 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा का शुल्क 1200 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए किया है। वहीं नामांकन शुल्क भी 300 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए किया गया है। वहीं डीएलएड परीक्षा शुल्क 7000, डीएलएड परीक्षा द्वितीय अवसर के दो विषय के लिए 3000 रुपए, चार विषय के लिए 5000 रुपए और चार से अधिक विषय के लिए 7000 रुपए शुल्क लगेगा। ऐसे में अनाथ विद्यार्थियों को इन शुल्कों से पूरी तरह छूट मिलने से उनके परिवार या आश्रयदाताओं पर आर्थिक बोझ कम होगा।
शुल्क माफी के लिए जरूरी होंगे दस्तावेज
इस सुविधा का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को नामांकन या परीक्षा फॉर्म भरते समय कुछ जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र। जिस रिश्तेदार के संरक्षण में विद्यार्थी रह रहा है, उसका संबंधित प्रमाण-पत्र। सरकारी अनाथालय या मान्यता प्राप्त संस्था में रहने की स्थिति में संबंधित प्रमाण-पत्र। निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर विद्यार्थी को शुल्क छूट का पात्र नहीं माना जाएगा।
आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई नहीं छूटेगी
माशिमं के इस फैसले का उद्देश्य माता-पिता को खो चुके विद्यार्थियों की शिक्षा को आर्थिक कारणों से प्रभावित होने से रोकना है। परीक्षा और नामांकन शुल्क माफ होने से ऐसे बच्चों के आश्रयदाताओं पर आर्थिक बोझ कम होगा और उनकी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।

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