
पुलिस मुख्यालय के इतिहास में पहली बार करीब 30 पुलिस कर्मचारियों की पदोन्नति एक साथ निरस्त होने जा रही है। मेडिकल बिल घोटाले और अन्य अनियमितताओं में नाम आने के बावजूद इन्हें पदोन्नति दे दी गई थी। अब रिव्यू डीपीसी ने इन पदोन्नतियों को नियमों के अनुरूप नहीं माना है। इन कर्मचारियों की उत्कृष्ट एसीआर लिखने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार गुरुवार को एडीजी देवप्रकाश गुप्ता की अध्यक्षता में हुई रिव्यू डीपीसी में मेडिकल बिल घोटाले से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। जांच में सामने आया कि करीब 4 करोड़ रुपए के मेडिकल बिल घोटाले में 48 कर्मचारी शामिल थे। इनमें केवल तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, जबकि 45 कर्मचारियों से राशि की रिकवरी की गई। बाद में इन्हीं कर्मचारियों में से दो दर्जन से अधिक को उत्कृष्ट एसीआर और बेदाग सेवा रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति दे दी गई। एक कर्मचारी के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज होने के बावजूद उसे भी प्रमोशन मिल गया।
