कम बारिश से बढ़ी सरकार की चिंता

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  • सूखे की आशंका से निपटने के लिए रणनीति तैयार; सीएम स्तर पर हो सकती है समीक्षा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश ने किसानों के साथ-साथ राज्य सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। प्रदेश में अब तक हुई वर्षा सामान्य से लगभग 19 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर की आशंका गहराने लगी है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने संभावित सूखे और फसल नुकसान से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। कृषि विभाग के अधिकारियों को वैकल्पिक रणनीति तैयार करने और मानसून की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में 5 अगस्त तक औसतन 16.27 इंच वर्षा दर्ज की गई है। यदि बारिश की कमी 20 प्रतिशत से अधिक हो जाती है तो मध्य प्रदेश को ‘बिलो नॉर्मल’ वर्षा श्रेणी में रखा जा सकता है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश इस सीमा के काफी करीब पहुंच चुका है, इसलिए आने वाले एक-दो सप्ताह की बारिश बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
खरीफ फसलों पर बढ़ा संकट
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम बारिश का सबसे अधिक प्रभाव सोयाबीन और धान जैसी खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। पर्याप्त नमी नहीं मिलने से सोयाबीन में फूल और फलियां झडऩे का खतरा बढ़ जाता है, जबकि धान की फसल में टिलरिंग (नई शाखाएं बनने की प्रक्रिया) प्रभावित होने से प्रति पौधा बालियों की संख्या घट सकती है। इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा। यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो फसलों की वृद्धि रुक सकती है, जिससे कृषि उत्पादन के साथ-साथ बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पडऩे की आशंका है।
सरकार ने शुरू की तैयारी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अधिकारियों को संभावित विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगले एक-दो सप्ताह तक वर्षा की स्थिति का लगातार आकलन किया जाएगा। यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर किसानों के लिए राहत और सहायता संबंधी योजनाओं पर तेजी से अमल किया जाएगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस बार सूखे की आशंका को देखते हुए राहत, फसल सर्वे, सहायता वितरण और अन्य आवश्यक उपायों की रूपरेखा पहले से तैयार की जा रही है, ताकि आवश्यकता पडऩे पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
मुख्यमंत्री कर सकते हैं उच्चस्तरीय समीक्षा
सूत्रों के मुताबिक यदि कम बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अगले सप्ताह कृषि और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश की स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं। मंत्रालय स्तर पर इसकी प्रारंभिक तैयारी शुरू हो चुकी है। सीएम सचिवालय ने सभी प्रभारी मंत्रियों से भी अपने-अपने जिलों में कम बारिश के कारण फसलों की वास्तविक स्थिति और संभावित नुकसान की जानकारी जुटाने को कहा है, ताकि समय रहते आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।
कृषि मंत्री बोले—घबराने की जरूरत नहीं
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने कहा कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी और खरीफ फसलों को बड़ा नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र से किसानों को परेशानी या फसल प्रभावित होने की सूचना मिलती है तो सरकार तत्काल राहत उपलब्ध कराएगी। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह सक्रिय हैं तथा संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कृषि कल्याण वर्ष में सरकार की चुनौती
मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। ऐसे समय में कमजोर मानसून सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एक ओर किसानों की फसल और आय की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर कृषि उत्पादन पर पडऩे वाले संभावित प्रभाव को कम करने के लिए समय पर निर्णय लेना भी सरकार की प्राथमिकता बन गया है। आने वाले दिनों में मानसून का रुख ही तय करेगा कि सरकार को केवल निगरानी तक सीमित रहना पड़ेगा या फिर राहत और सूखा प्रबंधन के बड़े कदम उठाने होंगे।

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