- मां बगलामुखी मंदिर दान विवाद…

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश के आगर मालवा के नलखेड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में दान संग्रह को लेकर विवादों में रही अशासकीय समिति की जांच पूरी हो गई है। जांच में वित्तीय अनियमितता नहीं मिली है। हालांकि, अशासकीय समिति का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं होने के कारण उसे अब मंदिर परिसर में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में मंदिर में अब कोई समानांतर अशासकीय समिति नहीं चलेगी। मंदिर के पास जमा समस्त नकद राशि, 29 किलोग्राम चांदी और 105 ग्राम सोना मंदिर की शासकीय प्रबंध समिति को सौंपा जाएगा। यह राशि और आभूषण शासकीय खाते एवं लॉकर में सुरक्षित रखे जाएंगे। कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि जांच दल ने समिति के बैंक खातों, लॉकर और अभिलेखों की जांच के साथ समिति सदस्यों से भी चर्चा की। रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई, लेकिन मंदिर परिसर में इस प्रकार की अशासकीय समिति का संचालन नियम विरुद्ध पाया गया।
श्रद्धालुओं को करेंगे जागरूक
प्रशासन श्रद्धालुओं को भी जागरूक करेगा ताकि उनका दान गलत हाथों में न पहुंचे। मंदिर परिसर में प्रचार-प्रसार के माध्यम से बताया जाएगा कि दान केवल अधिकृत दान पात्र या मंदिर समिति कार्यालय में रसीद प्राप्त कर ही करें। मंदिर कर्मचारियों को भी सक्रिय भूमिका दी जाएगी, जो दान देने वाले श्रद्धालुओं को तत्काल रसीद उपलब्ध कराने और व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
2024 में बनी थी समिति
जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 में गठित इस अशासकीय समिति द्वारा मंदिर परिसर में रसीद काउंटर लगाकर नकद राशि, सोना और चांदी का संग्रह किया जा रहा था। समिति की रसीदों पर पंजीयन क्रमांक, बैंक खाते का विवरण और मोबाइल नंबर भी अंकित थे। इसी व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिलने के बाद प्रशासन ने जांच कराई थी।
पूरी व्यवस्था को बनाएंगे पारदर्शी
इस मामले में कलेक्टर प्रीति यादव ने कहा कि मंदिर के विकास के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर एवं पारदर्शी व्यवस्था देना उनका लक्ष्य है। जांच में वित्तीय गड़बड़ी नहीं मिली है, लेकिन भविष्य में दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो।
दान व्यवस्था की होगी निगरानी
जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने मंदिर में दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया है। मंदिर में आने वाले प्रत्येक दान की निगरानी की जाएगी तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान केवल मंदिर विकास और मां की सेवा में ही उपयोग हो। मंदिर प्रबंधन से जुड़े जुड़ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि भविष्य में मंदिर के नाम पर किसी भी प्रकार की समानांतर व्यवस्था संचालित न होने पाए।
