- दतिया उपचुनाव और मानसून सत्र के बीच संगठन ने बदली रणनीति, ओरछा कार्यसमिति टली
- गौरव चौहान

दतिया उपचुनाव और 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र को देखते हुए 18-19 जुलाई को प्रस्तावित प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की ओरछा बैठक स्थगित कर दी गई है। अब यह बैठक अगस्त में होने की संभावना है। संगठन का प्रयास है कि पहली प्रदेश कार्यसमिति में राष्ट्रीय नेतृत्व की भी उपस्थिति रहे, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की व्यस्तता के कारण कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया गया। वहीं प्रदेश भाजपा ने आगामी निकाय चुनावों की तैयारी अभी से तेज कर दी है। संगठन ने जिलाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों में विधायकों की सक्रियता और जनाधार का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। दिल्ली नेतृत्व तक पहुंचे फीडबैक में आधे से अधिक भाजपा विधायकों की लोकप्रियता में गिरावट की बात सामने आने के बाद संगठन अब जमीनी स्थिति की अलग से पड़ताल कराएगा। इसके लिए जिलाध्यक्षों से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी।
प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र लिखकर हाल के संगठनात्मक कार्यक्रमों, मासिक बैठकों और केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन का विस्तृत ब्यौरा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में शामिल होने वाले पदाधिकारियों से वाहन साझा करने तथा अनावश्यक रूप से पीए और पीएसओ को साथ नहीं लाने का भी आग्रह किया गया है। सूत्रों के मुताबिक बैठक स्थगित करने का निर्णय दिल्ली नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद लिया गया। मप्र विधानसभा और संसद के मानसून सत्र, भाजपा की राष्ट्रीय टीम के गठन और वरिष्ठ नेताओं की व्यस्तता के कारण केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल मध्यप्रदेश प्रवास के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल के दिल्ली प्रवास के दौरान वरिष्ठ नेताओं से बैठक के लिए समय देने का आग्रह भी किया था, लेकिन उन्हें कार्यक्रम आगे बढ़ाने की सलाह दी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच हुई चर्चा में कार्यसमिति को अगस्त तक टालने पर सहमति बनी।
निकाय चुनाव की तैयारी अभी से शुरू
बैठक भले टल गई हो, लेकिन संगठन ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र भेजकर हाल के संगठनात्मक कार्यक्रमों, मासिक बैठकों और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। कार्यसमिति में प्रत्येक जिले के संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका कितनी प्रभावी रही। बैठक के लिए व्यवस्थागत निर्देश भी जारी किए गए हैं। पदाधिकारियों से सडक़ मार्ग से यात्रा करने पर वाहन साझा करने का आग्रह किया गया है, जबकि मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं से अनावश्यक रूप से अपने पीए और पीएसओ को साथ नहीं लाने की अपेक्षा की गई है।
जिलाध्यक्ष बनाएंगे विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
भाजपा संगठन ने इस बार केवल संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा है। दिल्ली नेतृत्व तक पहुंचे फीडबैक में कई विधायकों के जनाधार में गिरावट की बात सामने आने के बाद अब जिलाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों के विधायकों की जमीनी स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के आधे से अधिक विधायकों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। इनमें कुछ मंत्री भी शामिल हैं। ऐसे में जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट के आधार पर संगठन वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करेगा। माना जा रहा है कि भविष्य में संगठनात्मक जिम्मेदारियों और टिकट वितरण जैसे फैसलों में भी इन रिपोर्टों का महत्व बढ़ सकता है।
बयानबाजी पर लगेगी लगाम
पिछले कुछ महीनों में भाजपा के कई नेताओं और विधायकों द्वारा सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों ने संगठन को असहज किया है। सरकार और संगठन से जुड़े मुद्दों पर खुलेआम की गई टिप्पणियों से पार्टी की छवि प्रभावित हुई है। यही कारण है कि आगामी कार्यसमिति में नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि सार्वजनिक बयान पार्टी की अधिकृत गाइडलाइन के अनुरूप ही दिए जाएं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि निकाय चुनाव से पहले अनुशासन बनाए रखना संगठन की प्राथमिकता है। विशेष रूप से उन नेताओं पर नजर रहेगी, जिन्हें पहले भी कई बार समझाइश दी जा चुकी है, लेकिन उन्होंने बयानबाजी पर नियंत्रण नहीं रखा।
मानसून सत्र से पहले रणनीति
20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से पहले भाजपा विधायक दल की बैठक भी प्रस्तावित है। इसमें विधायकों से उनके क्षेत्रों में गेहूं सहित अन्य फसलों की एमएसपी पर हुई खरीदी, सरकार की योजनाओं की प्रगति और विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों पर चर्चा होगी। सरकार और संगठन सत्र के दौरान एक समान रणनीति के साथ विपक्ष का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।
ओरछा बैठक का राजनीतिक महत्व
ओरछा में होने वाली कार्यसमिति केवल नियमित संगठनात्मक बैठक नहीं मानी जा रही है। यह प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पहली प्रदेश कार्यसमिति होगी, इसलिए संगठन चाहता है कि इसमें केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी के साथ भविष्य की राजनीतिक रणनीति, निकाय चुनाव की तैयारी, संगठन विस्तार और सरकार-संगठन के समन्वय पर व्यापक चर्चा हो। इसी कारण बैठक को जल्दबाजी में आयोजित करने के बजाय ऐसे समय पर कराने की तैयारी है, जब राष्ट्रीय नेतृत्व भी उसमें शामिल हो सके। कार्यसमिति स्थगित होने के बावजूद भाजपा ने संगठन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब फोकस केवल कार्यक्रमों के आयोजन पर नहीं, बल्कि जमीनी प्रदर्शन, संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी तैयारी पर रहेगा। जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट, विधायकों की सक्रियता, नेताओं की बयानबाजी और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा आने वाले महीनों में संगठन की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहने वाली है।
