मंत्रालय में समय पर नहीं पहुंच रहे अधिकारी-कर्मचारी

  • सीएम के निर्देशों का असर नहीं:चार बार सख्त निर्देश, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था; मंत्रालय में दो अटेंडेंस सिस्टम फेल

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सख्ती के बावजूद मध्यप्रदेश के सरकारी कार्यालयों में समयपालन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। सबसे चिंताजनक तस्वीर राज्य मंत्रालय वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की है, जहां बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय के बाद कार्यालय पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक केंद्र ही समयपालन सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है, तो जिलों और मैदानी कार्यालयों में स्थिति कैसी होगी। मुख्यमंत्री ने पिछले दो महीनों में चार बार अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए हैं। 15 मई को समीक्षा बैठक में उन्होंने मंत्रालय सहित सभी सरकारी कार्यालयों में बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने और स्वयं समयपालन की निगरानी करने की बात कही थी। इससे पहले जनवरी में भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समयपालन में सुधार नहीं हुआ तो सप्ताह में छह दिन कार्यालय खोलने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।
    मुख्यमंत्री की सख्ती के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) अब तक प्रदेशभर में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू नहीं कर पाया है। मंत्रालय में अप्रैल से नई उपस्थिति व्यवस्था शुरू करने की तैयारी थी, जिसमें फेस स्कैन, स्मार्ट कार्ड पंच और मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए मध्यप्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसआईडीसी) को मशीनों और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन तीन महीने बाद भी यह व्यवस्था धरातल पर नहीं उतर सकी है।
    दो प्रयोग भी नहीं बदल सके तस्वीर
    मंत्रालय में समयपालन सुनिश्चित करने के लिए पिछले एक वर्ष में दो अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू की गईं, लेकिन दोनों ही प्रभावी साबित नहीं हुईं। जून 2024 में उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर की व्यवस्था शुरू की गई। फरवरी 2025 में आधार आधारित फेस अटेंडेंस सिस्टम लागू किया गया। इन दोनों व्यवस्थाओं के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की लेटलतीफी पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। मंत्रालय में करीब 1,500 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक है। प्रदेश सरकार ने 8 अप्रैल 2021 से केंद्र सरकार की तर्ज पर सरकारी कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू की थी। इसके तहत कार्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे निर्धारित किया गया।
    वाहन शेयरिंग की पहल भी ठंडी
    ईंधन बचत और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मई में वरिष्ठ अधिकारियों को वाहन साझा कर कार्यालय आने के निर्देश दिए थे। हालांकि यह पहल भी कागजों तक सीमित नजर आ रही है। अधिकांश अधिकारी पहले की तरह अपने-अपने निजी या शासकीय वाहनों से ही कार्यालय पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर चुके हैं और राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं। कुछ मंत्रियों ने भी अपने काफिलों का आकार घटाया है, लेकिन नौकरशाही में इसका असर दिखाई नहीं दे रहा।
    सिर्फ हाजिरी नहीं, काम का भी हो मूल्यांकन
    सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नियाज खान का मानना है कि केवल समय पर कार्यालय पहुंचना ही प्रशासनिक सुधार का पैमाना नहीं हो सकता। उनके अनुसार कई कर्मचारी पूरे समय कार्यालय में मौजूद रहते हैं, लेकिन कार्य निष्पादन अपेक्षित स्तर का नहीं होता। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को दैनिक कार्य-आधारित ऑनलाइन अप्रेजल सिस्टम लागू करना चाहिए, जिसमें प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय छोडऩे से पहले यह दर्ज करे कि उसने दिनभर में कितनी फाइलों का निस्तारण किया, कौन-कौन से कार्य पूरे किए और उनका परिणाम क्या रहा। इसी आधार पर गोपनीय चरित्रावली (सीआर), वेतन वृद्धि और पदोन्नति जैसे निर्णय लिए जाएं। उनका मानना है कि उपस्थिति के साथ जवाबदेही सुनिश्चित होने पर ही सरकारी कार्यालयों की कार्य संस्कृति में वास्तविक सुधार संभव होगा। सरकार समयपालन, डिजिटल उपस्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लगातार निर्देश जारी कर रही है, लेकिन यदि इनका पालन कराने वाली एजेंसियां ही प्रभावी कार्रवाई नहीं करेंगी तो सुधार की मंशा फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी। अब नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग केवल नई व्यवस्था लागू करता है या उसके पालन को भी सख्ती से सुनिश्चित करता है।

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