
देशभर के कोचिंग सेंटरों में छात्रों के बढ़ते तनाव, आत्महत्याओं, डमी स्कूलों और सुरक्षा खामियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार कोचिंग सेक्टर को रेगुलेट करने के लिए एक राष्ट्रीय कानून बनाने और एंट्रेंस एग्जाम को फिर से डिजाइन करने पर विचार कर रही है। दरअसल, शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय नौ-सदस्यीय समिति ने सिफारिश की है कि जेईई-नीट-यूजी और सीयूईटीञ्ज-यूजी जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं के पैटर्न में इस तरह बदलाव किया जाए कि उनमें निजी कोचिंग की भूमिका कम से कम हो सके। शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित नौ-सदस्यीय समिति का गठन जून, 2025 में हायर एजुकेशन सेक्रेटरी विनीत जोशी की अध्यक्षता में किया गया था, इस समिति का उद्देश्य छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता, डमी स्कूलों के प्रसार और अहम एंट्रेंस टेस्ट की निष्पक्षता की जांच करना है। समिति ने जांच के दौरान पाया कि कोचिंग पर निर्भरता की समस्या को सिर्फ इंस्टीट्यूट की जांच या भ्रामक विज्ञापनों पर जुर्माना लगाकर हल नहीं किया जा सकता।
