जर्जर पुलों पर दौड़ रही जिंदगी

जर्जर पुलों
  • सुरक्षा ऑडिट अधूरा, 46 पुल बेहद खतरनाक श्रेणी में

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में हजारों लोग रोज जिन पुलों और पुलियों से गुजरते हैं, उनमें से सैकड़ों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के रिकॉर्ड में प्रदेश के 253 पुल जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इनमें 46 पुल ऐसे हैं, जिन्हें बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी वार्षिक सुरक्षा ऑडिट और भौतिक निरीक्षण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बारिश के मौसम में नदियों और नालों का जलस्तर बढऩे के साथ इन पुलों पर जोखिम और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में पुलों की संरचनात्मक स्थिति का समय पर परीक्षण सबसे जरूरी होता है, लेकिन इस बार निर्धारित समय सीमा गुजरने के बाद भी कई स्थानों पर निरीक्षण अधूरा है।
सुप्रीम कोर्ट की अनुशंसा फिर भी सुस्ती
सडक़ सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों के लिए पुलों और पुलियों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। इसी के अनुरूप इंडियन रोड कांग्रेस और मध्यप्रदेश पीडब्ल्यूडी के क्वालिटी कंट्रोल मैनुअल में भी स्पष्ट प्रावधान हैं कि हर वर्ष 15 जून तक सभी पुलों और पुलियों का भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया जाए। इस निरीक्षण का उद्देश्य संभावित खामियों की समय रहते पहचान कर उनकी मरम्मत और मजबूतीकरण सुनिश्चित करना होता है, ताकि बड़े हादसों को रोका जा सके।
जिम्मेदारियां तय, लेकिन रिपोर्ट अधूरी
विभागीय व्यवस्था के अनुसार छोटे पुलों और पुलियों के निरीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित सब इंजीनियर और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की होती है, जबकि बड़े पुलों का विस्तृत निरीक्षण कार्यपालन यंत्री (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) स्तर पर किया जाता है। निरीक्षण के दौरान पुल की नींव, बियरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट, डेक, रेलिंग और जल निकासी व्यवस्था सहित कई तकनीकी बिंदुओं की जांच की जाती है। साथ ही पुल के नीचे जमी गाद और जलमार्ग की स्थिति का भी आकलन किया जाता है। नियमों के अनुसार निरीक्षण के बाद जियो-टैग्ड फोटो सहित पूरी रिपोर्ट विभागीय सॉफ्टवेयर और ब्रिज रजिस्टर पर अपलोड करना अनिवार्य है। हालांकि विभागीय स्तर पर यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ आर.एल. वर्मा का कहना है कि निरीक्षण की प्रक्रिया सर्कल स्तर पर चल रही है और सभी जिलों से रिपोर्ट अभी प्राप्त होना बाकी है। चिंता की बात यह है कि संवेदनशील पुलों की सूची में केवल दशकों पुराने ढांचे ही शामिल नहीं हैं। हाल के वर्षों में बने कुछ नए पुलों में भी तकनीकी कमियां सामने आई हैं। इनमें 2024 में छतरपुर जिले की धसान नदी पर बना उच्चस्तरीय पुल और 2021 में तैयार रीवा शहर का फ्लाईओवर भी शामिल हैं। इन संरचनाओं को भी विशेष निगरानी और मजबूतीकरण की आवश्यकता वाली श्रेणी में रखा गया है।

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