मप्र का पावर नेटवर्क होगा और मजबूत

पावर नेटवर्क
  • 7,668 करोड़ के निवेश से बिछेंगी नई ट्रांसमिशन लाइनें

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए बिजली ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक के लिए 14वीं ट्रांसमिशन विस्तार योजना तैयार की है। इस योजना के तहत प्रदेश में करीब 7,668 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसके जरिए 4,867 सर्किट किलोमीटर नई एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई जाएंगी और 9,608 एमवीए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता विकसित की जाएगी।
योजना का उद्देश्य प्रदेश में बढ़ती बिजली खपत, नए बिजली उत्पादन संयंत्रों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और राष्ट्रीय ग्रिड से बेहतर समन्वय को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को अधिक सक्षम बनाना है। इसके लिए वित्तीय सहायता आरईसी, पीएसडीएफ, बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण और राज्य सरकार के सहयोग से जुटाई जाएगी। एमपी ट्रांसको ने इसके अलावा 4,387 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। आयोग के आदेश के बाद इन परियोजनाओं पर भी काम शुरू होगा।
समयबद्ध परियोजनाओं पर विशेष फोकस
कंपनी का कहना है कि ट्रांसमिशन लॉस कम करने, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना बनाई गई है। परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए निवेश स्वीकृति, टेंडर प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण, राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) संबंधी समस्याओं के समाधान और लगातार मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एमपी ट्रांसको के अनुसार एडीबी, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, केएफडब्ल्यू और जाइका की सहायता से संचालित कई परियोजनाएं निर्धारित समय में पूरी की जा चुकी हैं। लगभग 1,200 करोड़ रुपये की जाइका परियोजना मार्च 2024 में सफलतापूर्वक पूरी हुई थी।
फाइबर नेटवर्क से बढ़ रही अतिरिक्त आय
ट्रांसमिशन नेटवर्क के साथ विकसित किए गए 15 हजार किलोमीटर लंबे 24-फाइबर ऑप्टिकल ग्राउंड वायर नेटवर्क से कंपनी को अतिरिक्त राजस्व भी मिल रहा है। इसमें से लगभग 11 हजार किलोमीटर नेटवर्क भारत सरकार की पीएसडीएफ योजना के तहत स्थापित किया गया है। कंपनी ने अपनी जरूरत के लिए 8 फाइबर सुरक्षित रखे हैं, जबकि शेष फाइबर को व्यावसायिक उपयोग के लिए निजी कंपनियों को लीज पर दिया जा रहा है। पहले चरण में 9,250 फाइबर-पेयर किलोमीटर नेटवर्क लीज पर दिया जा चुका है और दूसरे चरण की प्रक्रिया जारी है।
बिजली उत्पादन पर अब तकनीकी निगरानी और सख्त होगी
इधर, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने बिजली उत्पादन इकाइयों की कार्यक्षमता बढ़ाने और तकनीकी खराबियों को कम करने के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ताप और जल विद्युत गृहों में वार्षिक तथा पूंजीगत ओवरहॉल के बाद प्रत्येक उत्पादन इकाई की तकनीकी समीक्षा की जाएगी। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह के अनुसार अनुभवी और युवा अभियंताओं की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, जो प्रत्येक यूनिट की कार्यप्रणाली, तकनीकी स्थिति और ओवरहॉल के बाद के प्रदर्शन की निगरानी करेंगी। ये टीमें तकनीकी ट्रिपिंग के कारणों का विश्लेषण कर सुधारात्मक उपायों की समीक्षा भी करेंगी।
5,492 मेगावाट की स्थापित क्षमता
वर्तमान में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के पास कुल 5,492 मेगावाट स्थापित उत्पादन क्षमता है। इसमें चार ताप विद्युत गृहों से 4,570 मेगावाट, 10 जल विद्युत गृहों से 915 मेगावाट तथा रतागुरडिया सौर परियोजना से 7 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। नई तकनीकी निगरानी व्यवस्था से बिजली उत्पादन इकाइयों की दक्षता, सुरक्षा और विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है। वहीं ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार से प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।

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