चीतों के स्वागत को तैयार रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व
  • 439 हेक्टेयर में विकसित हो रहा नया आवास, कूनो के गौरव समेत पांच चीतों की हो सकती है एंट्री

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में चीता पुनस्र्थापना परियोजना लगातार विस्तार पा रही है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा बड़ा ठिकाना बनने जा रहा है। रिजर्व के 439 हेक्टेयर वन क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष आवास तैयार किया जा रहा है, जिसका करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वन विभाग का लक्ष्य इस महीने के अंत तक सभी तैयारियां पूरी कर चीतों को यहां बसाने का है।
मध्य प्रदेश में चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके लिए नए और सुरक्षित आवास विकसित किए जा रहे हैं। कूनो से तीन चीतों को पहले ही गांधी सागर में स्थानांतरित किया जा चुका है, जबकि अब रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को अगले केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 50 वनकर्मियों को कूनो में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है तथा आसपास के 40 गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर 4 हजार से अधिक लोगों को चीता संरक्षण की जानकारी दी गई है।  रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की 1975 में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापना की गई। प्रारंभिक क्षेत्रफल 1,197 वर्ग किलोमीटर था। इसे 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया और नया नाम वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व रखा गया। अब इसका कुल क्षेत्रफल 2,339 वर्ग किलोमीटर है। वहीं कोर एरिया 1,414 वर्ग किलोमीटर और  बफर एरिया 925.12 वर्ग किलोमीटर है। अब इसका विस्तार सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों तक हो गया है।
सुरक्षा के लिए विशेष बाड़े
चीतों के लिए बनाए जा रहे परिसर में क्वारंटीन बोमा और सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किए जा चुके हैं। सुरक्षा के लिहाज से 14 फीट ऊंचे सॉफ्ट रिलीज बाड़े और 10 फीट ऊंचे क्वारंटीन बाड़े बनाए गए हैं। इनके ऊपर छह परतों वाले इलेक्ट्रिक पल्स तार लगाए जाएंगे, जिससे अन्य शिकारी जानवरों की घुसपैठ रोकी जा सके। जानकारी के अनुसार, कूनो के चर्चित चीते ‘गौरव’ सहित दो नर और दो मादा चीतों को यहां शिफ्ट किए जाने की संभावना है। वर्तमान में कूनो चीता परियोजना का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां चीतों की संख्या 53 तक पहुंच गई है। किसी वन्यजीव को नए स्थान पर लाने के बाद सबसे पहले उसे क्वारंटीन बोमा में रखा जाता है। यहां उसके स्वास्थ्य की जांच की जाती है और संक्रमण या बीमारी की आशंका को खत्म किया जाता है। इसके बाद जानवर को सॉफ्ट रिलीज बोमा में स्थानांतरित किया जाता है, जहां वह नए वातावरण के अनुरूप खुद को ढालता है। इस दौरान उसे प्राकृतिक शिकार और जंगल की परिस्थितियों से परिचित कराया जाता है। पूरी तरह अनुकूलन होने के बाद उसे खुले जंगल में छोड़ा जाता है।
देश का अनूठा रिजर्व बनेगा
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व देश का ऐसा अनूठा संरक्षित क्षेत्र बन सकता है, जहां बाघ, तेंदुआ और चीता एक ही परिदृश्य में अलग-अलग क्षेत्रों में निवास करेंगे। रिजर्व के मुहली, सिंहपुर और झापन रेंज में करीब 600 वर्ग किलोमीटर के खुले घास के मैदान मौजूद हैं। यहां चिंकारा, चीतल और सांभर जैसे शिकार प्रजातियों की पर्याप्त संख्या है, जो चीतों के लिए उपयुक्त भोजन उपलब्ध कराती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों बड़े शिकारी जीवों की शिकार शैली अलग होने के कारण इनके बीच संघर्ष की संभावना कम रहती है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि चीतों के लिए 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे आवास का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष तैयारियां भी जल्द पूरी कर ली जाएंगी और इसके बाद चीतों को यहां बसाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह परियोजना न केवल चीता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि मध्य प्रदेश को देश में वन्यजीव संरक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत करेगी।

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