मप्र के 8 शहरों में लगेंगे बायोगैस संयंत्र

  • 282.44 करोड़ की लागत से लगेंगे प्लांट, स्वच्छता के साथ बढ़ेगा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश में शहरी कचरे के निपटान और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश के 8 शहरों में कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाने के लिए 282.44 करोड़ रुपए की लागत से प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रतिदिन 1055 टन ठोस कचरे का उपयोग कर करीब 40 टन गैस का उत्पादन किया जाएगा। इससे एक ओर शहरों में कचरा प्रबंधन की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता भी बढ़ेगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत इन परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। परियोजनाओं का निर्माण डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर  मॉडल के तहत होगा। कचरे के संग्रहण और परिवहन की जिम्मेदारी संबंधित नगरीय निकायों की होगी। प्रदेश में कुल 8 सीबीजी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें देवास, रतलाम, उज्जैन और ग्वालियर में स्वतंत्र परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी, जबकि बुरहानपुर, खंडवा, मुरैना और सागर में क्लस्टर मॉडल के तहत आसपास के नगरों का कचरा भी उपयोग किया जाएगा।
पांच परियोजनाओं को मिल चुका है ठेका
नगरीय विकास विभाग ने बताया कि देवास, रतलाम, मुरैना, बुरहानपुर और खंडवा के सीबीजी प्लांटों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर संबंधित कंपनियों को कार्य आवंटित कर दिया गया है। वहीं उज्जैन, ग्वालियर और सागर की परियोजनाओं में कुछ तकनीकी संशोधनों के बाद निविदा प्रक्रिया जारी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजनाओं के निर्माण के लिए 8 माह और कमीशनिंग के लिए 12 माह का समय निर्धारित किया गया है। सफल परीक्षण के दो माह बाद प्लांटों का व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
काफी फायदेमंद है प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट से कई फायदे होंगे। लैंडफिल साइटों पर कचरे का दबाव कम होगा। कचरे से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होगा। शहरों में नियमित और वैज्ञानिक कचरा निस्तारण सुनिश्चित होगा। कंपोस्ट और आरडीएफ के व्यावसायिक उपयोग से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता बढ़ेगी। प्रदेश सरकार का मानना है कि ये परियोजनाएं स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी तथा शहरी क्षेत्रों में कचरे को संसाधन में बदलने का नया मॉडल स्थापित करेंगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच पहल
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने घरेलू कचरा प्रबंधन और आदेशों के पालन की निगरानी के लिए 6 सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट एम्पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी (स्ष्टरूष्ट) का गठन किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लीगेसी वेस्ट के निपटान में तय समय-सीमा का उल्लंघन होने पर जवाबदेही तय की जाएगी। कलेक्टरों को कचरा प्रबंधन की निगरानी, अवैध डंपिंग स्थलों की पहचान तथा दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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