सरदार सरोवर मुआवजा विवाद… मध्यप्रदेश-गुजरात में बनी सहमति

सरदार सरोवर मुआवजा विवाद
  • 7,388 करोड़ के हिसाब-किताब को लेकर हुई बैठक

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच पिछले 25 साल से चला आ रहा सरदार सरोवर बांध के मुआवजे का विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों राज्यों के बीच करीब 7,388 करोड़ रुपए के इस सबसे बड़े वित्तीय गतिरोध को सुलझाने के लिए पिछले 6 महीनों से बैक-टू-बैक बैठकों का दौर जारी है। इस सिलसिले में आखिरी हाई-प्रोफाइल बैठक 30 अप्रैल को अहमदाबाद में हो चुकी है। इसमें मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिव शामिल हुए। गुजरात ने पिछली बैठक में मप्र की देनदारियों को चुकाने को लेकर सैद्धांतिक सहमति (हामी) जताई है। लेकिन राशि का सटीक मिलान करने के लिए दोनों राज्यों की एक संयुक्त फाइनेंशियल टीम (वित्तीय टीम) बनाने के निर्णय लिया है। यह टीम दोनों राज्यों के दावों का अध्ययन कर रही है। दोनों राज्यों के दावों के अध्ययन के बाद अंतिम वित्तीय समायोजन किया जाएगा। इस संबंध में 30 जून से पहले एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जो भोपाल या मुंबई में आयोजित की जाएगी। इस बैठक में मध्यप्रदेश का पक्ष रखने और राज्य के हितों की पैरवी करने की कमान मुख्य सचिव अनुराग जैन और नर्मदा घाटी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा संभालेंगे।
ऊंचाई 58 मीटर बढऩे से बदले हालात
गांवों का आंकड़ा: 2002 में मप्र के 178 गांव (15,625.6 हेक्टेयर) सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में थे। 2019 में बांध पहली बार पूरी क्षमता से भरने पर वास्तविक स्थिति सामने आई। अब 192 गांवों की 20,822 हेक्टेयर भूमि डूब में है।
बढ़ गया डूब क्षेत्र: बांध की ऊंचाई बढऩे से मध्यप्रदेश की करीब 5,000 हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन हमेशा के लिए जलमग्न हो गई।
क्या है विवाद: सरदार सरोवर विवाद की मुख्य वजह मुआवजे की गणना है। मप्र ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून व 2019-20 के बाजार भाव के आधार पर 7,669 करोड़ रुपए का संशोधित दावा किया है। वहीं गुजरात 2001 की दरों के अनुसार 281 करोड़ रुपए देने पर अड़ा रहा। दूसरी ओर गुजरात ने बांध निर्माण व रखरखाव लागत का हिस्सा बताते हुए मप्र पर 5,516.50 करोड़ रुपए की देनदारी का दावा भी किया, जिसे मप्र ने खारिज कर दिया।

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