सरकारी विभागों के आगे बिजली कंपनियां बेबस

  • 2123 करोड़ की लंबित राशि की नहीं हो पा रही वसूली, नोटिसों तक सीमित कार्रवाई

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मध्य प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां सरकारी विभागों से बिजली बिलों की वसूली को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। प्रदेश के 16 से अधिक सरकारी विभागों पर बिजली कंपनियों का कुल 2123.9 रूपए करोड़ बकाया है, लेकिन बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद यह राशि पूरी तरह वसूल नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि कंपनियां बकायेदार विभागों से केवल 35 से 40 प्रतिशत राशि ही वसूल कर पा रही हैं, जबकि शेष भुगतान वर्षों से लंबित है।प्रदेश में पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र की वितरण कंपनियों के पास करीब 2.98 लाख सरकारी बिजली कनेक्शन हैं। इनमें सरकारी कार्यालयों, आवासों, जलापूर्ति योजनाओं तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए बिजली आपूर्ति की जाती है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह बकाया समय पर मिल जाए तो वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार हो सकता है।
     एक ओर बिजली कंपनियां राजस्व घाटे का हवाला देकर बिजली दरों में वृद्धि की मांग करती हैं और बकाया बिलों पर आम उपभोक्ताओं के खिलाफ सख्त वसूली अभियान चलाती हैं, वहीं सरकारी विभागों से बकाया वसूली में अपेक्षित कठोरता नहीं दिखने पर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित किए बिना बकाया राशि की वसूली कैसे सुनिश्चित की जाए। सूत्रों के अनुसार बिजली कंपनियां हर माह बकायेदार विभागों को नोटिस भेज रही हैं, लेकिन कनेक्शन काटने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं।
    पंचायत विभाग पर सबसे  ज्यादा देनदारी
    प्रदेश के तीनों वितरण क्षेत्रों में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर सबसे अधिक 820.4 करोड़ रूपए का बकाया दर्ज किया गया है। कुल सरकारी कनेक्शनों की संख्या 2,98,253 बताई गई है। आंकड़ों के अनुसार सबसे बड़ा बकायेदार पंचायत विभाग है, जिस पर लगभग 1230 करोड़ रूपए का बिजली बिल बकाया है। इसके बाद नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग पर 265.10 करोड़ रूपए और नर्मदा घाटी विकास विभाग पर 178.50 करोड़ रूपए की देनदारी है। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग पर 88.8 करोड़ रूपए, स्कूल शिक्षा विभाग पर 84.8 करोड़ रूपए तथा पीएचई विभाग पर 43.3 करोड़ रूपए का बकाया है। विशेष बात यह है कि पंचायत, नगरीय प्रशासन और नर्मदा घाटी विभागों पर ही कुल बकाया राशि का लगभग 79 प्रतिशत यानी 1674.3 करोड़ लंबित है।
    भुगतान के निर्देश जारी
    ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने बताया कि समय-समय पर समीक्षा बैठकों में सभी विभाग प्रमुखों को लंबित बिजली बिलों का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत और नगरीय विकास विभागों में जलापूर्ति योजनाओं से जुड़े कनेक्शनों का बकाया सबसे अधिक है। नोटिस जारी होने के बाद संबंधित विभाग चरणबद्ध तरीके से भुगतान भी कर रहे हैं। हालांकि, बकाया राशि का लगातार बढ़ता बोझ यह संकेत देता है कि सरकारी विभागों से समय पर भुगतान सुनिश्चित करना बिजली कंपनियों के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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