भर्ती बढऩेे से प्रशिक्षण व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों
  • पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी, अन्य शाखाओं से मांगे गए अधिकारी-कर्मचारी

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र पुलिस के प्रशिक्षण संस्थानों में स्टाफ की कमी अब रंगरूटों के प्रशिक्षण पर असर डालने लगी है। पिछले दो वर्षों से लगातार आरक्षक भर्ती और 2025 में सब इंस्पेक्टर व लिपिकीय संवर्ग की भर्ती प्रक्रिया के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में नए पुलिसकर्मी सेवा में आ रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षण केंद्रों की सीमित क्षमता और स्टाफ की कमी बड़ी चुनौती बन गई है। इसी स्थिति को देखते हुए पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने विभिन्न शाखाओं से अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति पर मांग की है।
    पीएचक्यू की प्रशिक्षण शाखा ने जिला पुलिस बल, विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ), रेडियो, बैंड, मोटर ट्रांसपोर्ट (एमटी) और आम्र्स शाखा को पत्र भेजकर इच्छुक अधिकारियों और कर्मचारियों के आवेदन मांगे हैं। आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के कर्मचारी प्रशिक्षण संस्थानों में सेवाएं देने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
    500 से अधिक पद रिक्त
    जानकारी के अनुसार प्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में लगभग 1500 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 500 से अधिक पद खाली पड़े हैं। दूसरी ओर, पुलिस भर्ती में तेजी आने से प्रशिक्षण संस्थानों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश के सभी प्रशिक्षण केंद्रों की कुल क्षमता लगभग 6000 प्रशिक्षुओं की है, जबकि भर्ती का आंकड़ा इससे कहीं अधिक पहुंच रहा है।
    अगले दो वर्षों में बढ़ेगा प्रशिक्षण भार
    पुलिस विभाग इस वर्ष आरक्षक (बैंड) के लगभग 800 पदों पर भर्ती करने जा रहा है। इसके अलावा 1000 पदों पर सब इंस्पेक्टर, सूबेदार और क्लेरिकल स्टाफ की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। विभागीय सूत्रों के अनुसार 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व से पहले पुलिस बल की कमी दूर करने के लिए अगले दो वर्षों तक हर साल 10 से 12 हजार आरक्षकों की भर्ती की जाएगी। नियमानुसार प्रत्येक चयनित जवान को नियुक्ति से पहले नौ माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें परेड, शारीरिक दक्षता, हथियार संचालन, कानून की जानकारी, अनुशासन, कानून-व्यवस्था नियंत्रण तथा साइबर अपराधों से निपटने जैसे विषय शामिल होते हैं।
    प्रशिक्षण केंद्रों की सीमित क्षमता
    प्रदेश में आरक्षक प्रशिक्षण के लिए कुल 10 पुलिस प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं। इनमें प्रमुख रूप से पुलिस अकादमी भौंरी (भोपाल), जेएनपीए सागर, पीटीसी इंदौर, पीटीएस रीवा, पीटीएस तिगरा (ग्वालियर),पीटीएस उमरिया, पीटीएस सागर,पीटीएस पचमढ़ी और आरएपीटीसी इंदौर शामिल हैं। इनकी संयुक्त क्षमता एक बैच में लगभग 5000 आरक्षकों को प्रशिक्षण देने की है। वहीं रेडियो कैडर और अधिकारी स्तर के प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता लगभग 1000 प्रशिक्षुओं की है।
    बटालियनों में करानी पड़ी ट्रेनिंग
    प्रशिक्षण केंद्रों में क्षमता और स्टाफ की कमी के कारण वर्ष 2023 बैच के करीब 6000 नव-आरक्षकों में से लगभग 1000 प्रशिक्षुओं को नियमित प्रशिक्षण स्कूलों के बजाय एसएएफ बटालियनों में प्रशिक्षण देना पड़ा था। भोपाल की 25वीं तथा इंदौर की 15वीं बटालियन ने अपने स्तर पर प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रशिक्षण स्कूलों में निर्धारित मानकों, संसाधनों और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की उपलब्धता के कारण वहां मिलने वाला प्रशिक्षण अधिक प्रभावी होता है। यही वजह है कि विभाग अब प्रशिक्षण संस्थानों में रिक्त पद भरने और उन्हें संसाधनों के साथ मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
    प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
    पुलिस मुख्यालय का मानना है कि आने वाले वर्षों में भर्ती की संख्या बढऩे के साथ प्रशिक्षण संस्थानों को भी उसी अनुपात में सशक्त बनाना आवश्यक होगा। इसके लिए प्रतिनियुक्ति के माध्यम से प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध कराने, रिक्त पदों को भरने और प्रशिक्षण केंद्रों के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने की योजना पर काम किया जा रहा है, ताकि भविष्य में बड़ी संख्या में भर्ती होने वाले पुलिसकर्मियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।

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