
- मुख्यमंत्री होंगे अध्यक्ष, कलेक्टर संभालेंगे पूरी कमान
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी में है। करीब 35 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन के अनुमान को देखते हुए सरकार न केवल 18 हजार करोड़ रुपये की अधोसंरचना परियोजनाओं पर काम कर रही है, बल्कि सिंहस्थ प्रबंधन के लिए नया और आधुनिक मेला कानून भी लाने जा रही है। प्रस्तावित सिंहस्थ मेला अधिनियम-2026 के तहत एक शक्तिशाली सिंहस्थ मेला प्राधिकरण गठित होगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे, जबकि पूरे मेला संचालन और विभिन्न विभागों के समन्वय की जिम्मेदारी कलेक्टर के हाथों में होगी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नए अधिनियम का प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रस्ताव के अनुसार सिंहस्थ मेला प्राधिकरण बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। विधानसभा के अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित मानसून सत्र में इस विधेयक को प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। नए कानून का मसौदा तैयार करने से पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मेला अधिनियम का अध्ययन कराया गया। अधिकारियों के दलों ने प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया। इसमें भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, एआई आधारित निगरानी, घाटों पर स्नान व्यवस्था, बिजली, पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन का अध्ययन किया गया।
1955 के कानून की जगह आएगा नया अधिनियम
सरकार का मानना है कि सात दशक पुराने मेला कानून से वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान संभव नहीं है। इसलिए नई तकनीक, विशाल जनसमूह और आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर नया अधिनियम तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई आधारित भीड़ प्रबंधन, डिजिटल निगरानी, केंद्रीकृत नियंत्रण प्रणाली और त्वरित निर्णय व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे। प्रस्तावित मेला प्राधिकरण में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य, जल संसाधन, ऊर्जा, परिवहन और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाएगा। हालांकि, जमीनी स्तर पर पूरे मेला संचालन की कमान कलेक्टर के पास रहेगी। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों का आवंटन, आपात स्थितियों में निर्णय और प्रशासनिक नियंत्रण की अंतिम जिम्मेदारी कलेक्टर की होगी।
राजस्व अधिकारियों को मिलेंगे मजिस्ट्रेटी अधिकार
मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा और प्रत्येक सेक्टर में राजस्व विभाग के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। इन अधिकारियों को कार्यपालक दंडाधिकारी (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) के अधिकार दिए जाएंगे ताकि वे मौके पर ही कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण, यातायात और अन्य प्रशासनिक मामलों में तत्काल निर्णय ले सकें। सरकार की कोशिश है कि सिंहस्थ-2028 केवल धार्मिक आयोजन न रहकर दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सुव्यवस्थित मानव समागमों में शामिल हो, जिसके लिए प्रशासनिक ढांचे को अभी से नए सिरे से तैयार किया जा रहा है।
