मप्र के हर संभाग में बनेंगे आधुनिक वेयरहाउस

आधुनिक वेयरहाउस
  • अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की कवायद

    भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम। मप्र में सरकार की कोशिश है कि हर व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुविधाएं मुहैया कराया जाए। इसके लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसी कड़ी में मप्र के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार दवा खरीदी एवं वितरण प्रणाली को केंद्रीकृत करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी संभागों में अत्याधुनिक दवा वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे, जहां कम से कम छह महीने की दवाओं का स्टॉक सुरक्षित रखा जाएगा।
    मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन द्वारा इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं और अगले एक सप्ताह में प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। इसके बाद चयनित एजेंसी सभी संभागों में मानकों के अनुरूप वेयरहाउस निर्माण का कार्य शुरू करेगी। इन वेयरहाउसों में तापमान नियंत्रण और दवाओं के सुरक्षित भंडारण की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों और जिलों की मांग, मौसमजनित बीमारियों की संभावित जरूरत तथा पिछले दस वर्षों की दवा खपत के आंकड़ों के आधार पर दवाओं की अग्रिम खरीद करेगा। इससे जरूरत पड़ते ही अस्पतालों को तत्काल दवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
    नई व्यवस्था से होंगे कई फायदे
    नई व्यवस्था से कई फायदे  होंगे। अस्पतालों में दवाओं की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी। दवाओं की उपलब्धता और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। वैज्ञानिक तरीके से भंडारण होने से दवाओं की गुणवत्ता बनी रहेगी और खराब होने की आशंका कम होगी। जांच प्रणाली मजबूत होने से मरीजों तक अमानक दवाएं पहुंचने का खतरा घटेगा।
    अभी 45 से 60 दिन लगते हैं सप्लाई में
    वर्तमान व्यवस्था में कॉर्पोरेशन द्वारा रेट कॉन्ट्रैक्ट किए जाने के बाद अस्पतालों के सिविल सर्जन और सीएमएचओ दवाओं का ऑर्डर देते हैं, लेकिन आपूर्ति में 45 से 60 दिन तक का समय लग जाता है। इसके कारण कई अस्पतालों में दवाओं की कमी की शिकायतें सामने आती हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर बने वेयरहाउसों में भंडारण मानकों का पालन नहीं होने से दवाएं खराब होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। पिछले एक वर्ष में 27 से अधिक दवाएं गुणवत्ता जांच में अमानक पाई गईं, जिन्हें कॉर्पोरेशन ने ब्लैकलिस्ट किया है।
    जांच के बाद ही अस्पताल पहुंचेगी दवा
    नई व्यवस्था में वेयरहाउस स्तर पर दवाओं की अतिरिक्त जांच की जाएगी। कॉर्पोरेशन का दावा है कि किसी भी दवा को गुणवत्ता परीक्षण के बिना अस्पतालों तक नहीं भेजा जाएगा। निर्माता कंपनी की रिपोर्ट और एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला की जांच के अलावा कॉर्पोरेशन स्वयं भी रैंडम सैंपलिंग कर दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी करेगा। मप्र पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल के अनुसार, अस्पतालों में दवाओं की निरंतर और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दवा वितरण प्रणाली को पूरी तरह केंद्रीकृत किया जा रहा है और जल्द ही इसका क्रियान्वयन शुरू होगा।

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