- कांग्रेस कर रही अगले चुनाव से पहले जमीनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी
- गौरव चौहान

मप्र कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अब अगले ढाई वर्षों तक जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में पार्टी अपने विधायकों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर उन्हें पूरी तरह विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि विधायक संगठन के अतिरिक्त दायित्वों से मुक्त होंगे तो वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अधिक समय दे सकेंगे और पार्टी की राजनीतिक स्थिति को मजबूत बना पाएंगे। कांग्रेस लंबे समय से एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत की पक्षधर रही है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर इसका पूरी तरह पालन नहीं हो पाया। संगठन को मजबूत रखने और अनुभवी नेताओं का लाभ लेने के लिए कई विधायकों और पूर्व विधायकों को संगठनात्मक पद भी सौंपे गए थे। हालांकि हाल ही में कराए गए पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण ने इस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छह विधायक संभाल रहे हैं जिलों की कमान
संगठन सृजन अभियान के बाद कांग्रेस ने कई मौजूदा विधायकों को जिला कांग्रेस कमेटियों की जिम्मेदारी सौंपी थी। इनमें प्रमुख रूप से जयवर्धन सिंह, महेश परमार, ओमकार सिंह मरकाम, सिद्धार्थ कुशवाहा तथा संजय उइके शामिल हैं। इनके अलावा 21 पूर्व विधायकों को भी विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किन नेताओं से वापस लिया जा सकता है पद
सिद्धार्थ कुशवाहा: सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा वर्तमान में पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सतना जिलाध्यक्ष दोनों पदों पर हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आगामी चुनाव में सतना सीट पर मुकाबला और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त कर विधानसभा क्षेत्र में अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी जा सकती है।
ओमकार सिंह मरकाम: ओमकार सिंह मरकाम केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य होने के साथ-साथ डिंडौरी जिलाध्यक्ष और आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। आदिवासी राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए पार्टी उन्हें केंद्रीय चुनाव समिति और आदिवासी संगठन में बनाए रख सकती है, लेकिन जिलाध्यक्ष का पद वापस लेने पर विचार कर सकती है।
जयवर्धन सिंह: जयवर्धन सिंह गुना जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। पार्टी उन्हें उन क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी देना चाहती है जहां कांग्रेस पिछली बार हार गई थी। ऐसी स्थिति में उन्हें जिला अध्यक्ष पद से मुक्त किया जा सकता है। हालांकि नए जिलाध्यक्ष के चयन में उनकी राय महत्वपूर्ण रह सकती है।
महेश परमार: महेश परमार उज्जैन ग्रामीण जिला कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। संगठनात्मक स्तर पर उनका प्रदर्शन संतोषजनक माना जा रहा है, लेकिन भाजपा द्वारा ताराना क्षेत्र में बढ़ाई जा रही सक्रियता को देखते हुए पार्टी उन्हें विधानसभा क्षेत्र पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए कह सकती है।
चुनावी तैयारी पर फोकस
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव तक का समय संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का है। पार्टी इस अवधि में जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना चाहती है। इसी रणनीति के तहत विधायकों को संगठनात्मक दायित्वों से मुक्त कर क्षेत्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय करने का फैसला लिया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस के संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले का कहना है कि संगठन सृजन अभियान के दौरान जिन जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया है, उनके संबंध में निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि पार्टी संगठनात्मक मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और आवश्यकता पडऩे पर पदों में बदलाव किया जाएगा, चाहे संबंधित पदाधिकारी विधायक ही क्यों न हों। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम संगठन और चुनावी तैयारी के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि विधायक अपने क्षेत्रों में अधिक समय देंगे तो पार्टी को जमीनी स्तर पर इसका लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
सर्वे में सामने आई कमजोरियां
सूत्रों के अनुसार हाल ही में प्रदेश के कांग्रेस विधायकों की सक्रियता और जनाधार को लेकर कराए गए सर्वे में आधे से अधिक विधायकों की स्थिति अपेक्षा से कमजोर पाई गई है। रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि कई विधायक अपने क्षेत्रों में पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने संगठन और चुनावी तैयारी के बीच संतुलन बनाने के लिए नई रणनीति तैयार की है। पार्टी अब चाहती है कि विधायक अपने शेष कार्यकाल के दौरान पूरी तरह अपने विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस करें। यदि उनके पास संगठन का कोई अतिरिक्त पद है तो उसे वापस लिया जा सकता है, चाहे वह पद उन्हें संगठन सृजन अभियान के तहत ही क्यों न मिला हो।
10 जिलाध्यक्षों की परफॉर्मेंस पर सवाल
हाल ही में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों की सक्रियता का मूल्यांकन किया गया था। इस समीक्षा में प्रदेश के लगभग 10 जिलाध्यक्षों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाया गया। इनमें कुछ वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक भी शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं की संगठनात्मक जिम्मेदारियों के कारण क्षेत्रीय सक्रियता प्रभावित हो रही है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर क्षेत्रीय राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। इसी आधार पर कई पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है।
