- महिला, एससी-एसटी और ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर फोकस

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश भाजपा में नई प्रदेश कार्यसमिति को लेकर संगठनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में बनने जा रही नई कार्यसमिति को अंतिम रूप देने का काम लगभग पूरा हो चुका है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नई कार्यसमिति की घोषणा जल्द की जा सकती है। इसके बाद अगले महीने ऐतिहासिक नगरी ओरछा में पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक आयोजित करने की तैयारी है। भाजपा संगठन इस बैठक को आगामी नगरीय निकाय चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है। बैठक में बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति तैयार करने और आगामी तीन महीने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
इस बार भाजपा संगठन कार्यसमिति का आकार सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी संविधान के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यसमिति को करीब 105 सदस्यों तक सीमित रखने का निर्णय लिया है। वहीं विशेष आमंत्रित सदस्यों की संख्या भी कुल का अधिकतम 30 प्रतिशत यानी लगभग 32 तक रखने का फार्मूला तय किया गया है। इसे भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ कार्यकालों में कार्यसमिति का आकार लगातार बढ़ता गया था। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, नंदकुमार सिंह चौहान और राकेश सिंह के कार्यकाल में कार्यसमिति सदस्य, स्थायी आमंत्रित और विशेष आमंत्रित मिलाकर संख्या 400 से अधिक तक पहुंच गई थी। पिछली कार्यसमिति में कुल 463 सदस्य शामिल थे। संगठन का मानना है कि सीमित आकार होने से कार्यसमिति अधिक प्रभावी, सक्रिय और निर्णय लेने में सक्षम बन सकेगी।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
नई कार्यसमिति के गठन में महिला प्रतिनिधित्व भाजपा की प्राथमिकता में शामिल है। सूत्रों के मुताबिक पिछली कार्यसमिति में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत थी, जिसे इस बार बढ़ाकर 25 से 30 प्रतिशत तक ले जाने की तैयारी है। भाजपा संगठन महिला मोर्चा से जुड़े सक्रिय चेहरों, जनप्रतिनिधियों और संगठनात्मक अनुभव रखने वाली महिला नेताओं को अवसर देने की रणनीति पर काम कर रहा है। माना जा रहा है कि नई कार्यसमिति में 30 से अधिक महिलाओं को जगह मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पीछे भाजपा की नजर शहरी महिला मतदाताओं और युवा महिला नेतृत्व को मजबूत करने पर भी है।
सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश
भाजपा संगठन इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष ध्यान दे रहा है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले नेताओं को प्राथमिकता दिए जाने के संकेत हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी नए सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है, जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हों और संगठनात्मक पकड़ रखते हों। जिला प्रभारियों और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी कार्यसमिति में स्थान मिलने की संभावना है। भाजपा की कोशिश है कि संगठन में व्यापक प्रतिनिधित्व दिखाई दे, जिससे आगामी चुनावों में सामाजिक आधार और मजबूत हो सके।
बड़े शहरों का प्रभाव हो सकता है कम
कार्यसमिति का आकार छोटा होने से इस बार बड़े शहरों का दबदबा कम हो सकता है। अब तक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर और जबलपुर जैसे बड़े जिलों का कार्यसमिति में अधिक प्रभाव रहा है। लेकिन इस बार छोटे जिलों और नए चेहरों को भी अवसर देने की तैयारी है। संगठन का मानना है कि इससे क्षेत्रीय संतुलन बेहतर होगा और जिलों में संगठनात्मक सक्रियता बढ़ेगी।
हर तीन महीने में होगी बैठक
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगभग दस महीने बाद नई कार्यसमिति का गठन कर रहे हैं। कार्यसमिति घोषित होने के बाद उनके कार्यकाल की पहली बैठक ओरछा में आयोजित की जाएगी। पार्टी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि अब कार्यसमिति की बैठकें नियमित रूप से हर तीन महीने में आयोजित की जाएंगी। हर बैठक में अगले तीन महीने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी और उसके आधार पर संगठनात्मक गतिविधियां संचालित होंगी। भाजपा इसे सतत सक्रिय संगठन मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है।
नई कार्यसमिति की खास बातें
– कार्यसमिति का आकार करीब 105 सदस्यों तक सीमित रहेगा
– विशेष आमंत्रित सदस्य अधिकतम 32 तक हो सकते हैं
– महिलाओं की हिस्सेदारी 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी
– एससी, एसटी और ओबीसी नेताओं को प्राथमिकता
– छोटे जिलों और नए चेहरों को मौका मिलने के संकेत
– पहली कार्यसमिति बैठक ओरछा में प्रस्तावित
– हर तीन महीने में नियमित बैठक आयोजित करने की योजना
