- वन कर्मियों की भर्ती नहीं कर पा रहा विभाग, 5452 पद खाली

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्यप्रदेश में टाइगर स्टेट की पहचान के बीच बाघ संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व में से 4 बिना नियमित फील्ड डायरेक्टर के चल रहे हैं, जबकि वन अमले के 5452 पद खाली हैं। ऐसे समय में जब बाघों की मौत के मामले बढ़ रहे हैं, संरक्षण तंत्र की यह कमजोरी चिंता बढ़ा रही है।
मप्र में दो साल में 3 नए टाइगर रिजर्व बनाए गए। इनमें दो में अब तक फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई। वहीं दो पुराने टाइगर रिजर्व से फील्ड डायरेक्टरों को हटाया गया था, इसके बाद उनमें भी नई पदस्थापना नहीं हो पा रही है। पिछले साल प्रदेश में 55 बाघों की मौत हुई थी। इस बार अब तक 32 की मौत हो चुकी है। बाघों की मौत का आंकड़ा पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। बाघों की मौत को लेकर रोज नए-नए मामले आ रहे हैं। पिछले दिनों कान्हा टाइगर रिजर्व में 4 शावक समेत पांच बाघों की मौत हो गई थी। कैनाइन वायरस की वजह से बाघों की मौत हुई थी। हाल ही में ट्रैकुलाइजेशन के दौरान एक बाघ की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हो चुकी है। इससे पहले सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में करंट लगाकर बाघ को मारा गया था। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके बाद भी टाइगर रिजर्व में वन अमले के साथ प्रमुख पद खाली पड़े हुए हैं।
अगले साल जारी होना है बाघ गणना के आंकड़े
टाइगर स्टेट मप्र में पिछली गणना में 785 बाघ मिले थे। अगली बाघ गणना के आंकड़े अगले साल जुलाई में जारी होंगे। इसके लिए प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती अंतिम चरण में चल रही है। ज्यादातर टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती पूरी हो चुकी है। इसी बीच बारों की मौत के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में तय है कि अगली बाघ गणना में बाघों के आंकड़े प्रभावित हो सकते हैं।
इन टाइगर रिजर्व में नहीं हैं फील्ड डायरेक्टर
राजधानी से सटे रातापानी अभयारण्य को दिसंबर 2024 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिल चुका है। सवा साल बाद भी इस टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। टाइगर रिजर्व में सुविधाओं का भी इजाफा नहीं हो पाया है। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की स्थापना सितंबर 2023 में की गई थी। इसे नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बनाया गया है। यहां दो साल बाद भी फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। अब इस टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व भी प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं।
