30 जिलों की आंगनवाडिय़ों में दो माह से नहीं बंटा पोषण आहार

  • 300 करोड़ का भुगतान ना मिलने से एजेंसियों ने रोकी टेक होम राशन सप्लाई

गौरव चौहान
भुगतान में देरी, वितरण व्यवस्था में बदलाव और बजट में बढ़ोतरी न होने के कारण प्रदेश की आंगनवाडिय़ों के शिशुओं और माताओं को पूरक पोषण आहार यानि टेक-होम राशन का मामला इस कदर गड़बड़ा गया है कि 30 जिलों में दो माह से पोषण आहार नहीं बंटा है। इससे 33 लाख बच्चे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। इस वजह से अधिकतर माताओं ने बच्चों को लेकर आंगनवाड़ी आना बंद कर दिया है। इससे आंगनवाडिय़ों में ताले लगने की नौबत आ गई है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पोषण आहार आपूर्ति करने वाली एजेंसियों को सरकार की तरफ से 300 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना था। बकाया ना मिलने से एजेंसियों ने वितरण रोक दिया है। इस संदर्भ में सच्चाई यह सामने आई है कि विभाग को इस नए वित्तीय वर्ष के बजट में 134 करोड़ रुपए की राशि नहीं मिली है। इस कारण उसने एजेंसियों को भुगतान फिलहाल रोक रखा है।
जानकारी के अनुसार, मप्र में महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार यानी टेक होम राशन की सप्लाई व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। प्रदेश के करीब 30 जिलों में पिछले दो महीनों से राशन वितरण पूरी तरह ठप पड़ा है। इसका सीधा असर आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं पर पड़ रहा है। विभागीय दस्तावेजों और अधिकारियों के पत्राचार से साफ है कि सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा चुकी है, लेकिन इसके समाधान को लेकर सरकार और संबंधित एजेंसियों के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले पोषण अभियानों और रैंकिंग में भी मप्र के कई जिले लगातार पिछड़ रहे हैं। पूरक पोषण आहार महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों पर दिया जाता है। इसके वितरण का जिम्मा विभाग ने आजीविका मिशन को दिया है, जो कि निर्धारित करीबन एक दर्जन एजेंसियों के जरिए टेक-होम राशन आंगनवाडिय़ों तक पहुंचाती है। बीते दो माह से पोषण आहार ना मिलने की जानकारी का खुलासा होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है।
निजी सप्लायर्स ने रोकी सामग्री
जानकारी के अनुसार प्रदेश में संचालित सात टेक होम राशन प्लांटों पर करीब 300 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है। राशन निर्माण के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले निजी सप्लायर्स को लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्होंने सामग्री की सप्लाई बंद कर दी। इसका सीधा असर संयंत्रों के संचालन पर पड़ा और कई प्लांट बंद होने की स्थिति में पहुंच गए। वित्तीय संकट को देखते हुए वित्त विभाग ने वर्ष 2026-27 के बजट में रेडी टू ईट टेक होम राशन योजना के लिए 134 करोड़ रुपए मंजूर किए थे, लेकिन यह राशि अब तक जारी नहीं की गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि भुगतान लंबित रहने से उत्पादन इकाइयों में काम लगभग ठप हो गया है। यही कारण है कि आंगनवाड़ी केंद्रों तक राशन पहुंचाने की पूरी व्यवस्था टूट गई है। मिली जानकारी के अनुसार भोपाल में करीबन एक हजार आंगनवाड़ी है, जहां 35 हजार बच्चों को पूरक पोषण आहार दिया जाता है। सहायिकाओं के अनुसार अप्रैल मध्य के बाद शहर की 70 फीसदी आंगनवाडिय़ों पर बच्चे और माताएं पोषण ओहार नहीं मिलने से आना बंद कर दिया है। इसकी वजह से आंगनवाडिय़ां सूनी पड़ी हैं। टेक-होम राशन सप्लाई से चार जिलों में सबसे बुरी स्थिति है। राशन वितरण बंद होने का खुलासा सबसे पहले सागर के संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास ने किया। उन्होंने बीते 15 मई को आजीविका मिशन संचालित पोषण आहार संयंत्र सीईओ को पत्र लिख कर बताया कि 26 फरवरी से टेक होम राशन वितरण नहीं हो रहा है। इससे 33 लाख बच्चे और माता वंचित है। यही स्थिति नर्मदापुरम, रीवा और मंडला जिलों की भी है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा सीधा असर
टेक होम राशन योजना का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़े छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है। यह राशन खास तौर पर कुपोषण रोकने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधारने के लिए दिया जाता है। लेकिन लगातार सप्लाई बंद रहने से सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ रहा है, जो सरकारी पोषण योजनाओं पर निर्भर हैं। ग्रामीण इलाकों में कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हितग्राही लगातार राशन के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई जवाब नहीं है। कई केंद्रों में महीनों से वितरण रजिस्टर खाली पड़े हैं। इससे सरकार की पोषण योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। टेक- होम राशन यानि पूरक पोषण आहार के अंतर्गत 6 माह से 3 साल के बच्चों के लिए सूजी, रागी या आटे का हलवा, दलिया और खिचड़ी, मिश्रित आटे का सत्तू, पोहा और उपमा शामिल है. वही गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पंजीरी, सत्तू-गुड़ और मीठा दलिया, सादी दाल, रोटी, हरी मौसमी सब्जियां, और चावल के अलावा अतिपोषित बच्चों के लिए रेडी टू ईट पैकेट में एनर्जी-डेंस फूड और पीनट बटर शामिल है, जिसका वितरण आंगनवाडिय़ों को किया जाता है। महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया का कहना है कि जिलों के आंगनवाडिय़ों में टेक-होम राशन की सप्लाई बंद होने की जानकारी मिली है। इनका वितरण करने वाली एजेंसियों पर जो बकाया है, उसका भुगतान चालू वित्त वर्ष से मिलने वाली राशि से जल्द कर देंगे। हमने वित्त विभाग से बजट राशि जल्दी स्वीकृत करने पत्र भी लिखा है।

Related Articles