वित्तीय बोझ के कारण मंत्रालय में अटका पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
मध्य प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाने का इंतजार कर रहे लाखों बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवा महिलाओं को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। भाजपा सरकार के गठन के बाद से पेंशन वृद्धि की उम्मीदें लगातार बनी हुई हैं, लेकिन सवा साल से यह प्रस्ताव मंत्रालय में ही अटका हुआ है। वित्तीय बोझ के कारण सरकार फिलहाल इस दिशा में कोई बड़ा फैसला लेने के मूड में नजर नहीं आ रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने फरवरी 2025 में वित्त विभाग को सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में बुजुर्ग, दिव्यांग और कल्याणी (विधवा) पेंशन को मौजूदा 600 रुपए से बढ़ाने की बात कही गई थी। हालांकि वित्त विभाग ने सरकारी खजाने पर पडऩे वाले अतिरिक्त भार का हवाला देते हुए प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर रख दिया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस विषय पर उचित समय पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव 2018 में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 300 रुपए से बढ़ाकर 1000 रुपए करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने पेंशन राशि 300 से बढ़ाकर 600 रुपए की थी। लेकिन मार्च 2020 में सरकार गिरने के कारण यह राशि 1000 रुपए तक नहीं पहुंच सकी।
मासिक खर्च बढ़कर 840 करोड़ हो जाएगा
प्रदेश में वर्तमान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के करीब 56 लाख हितग्राही हैं। सरकार इनके खातों में हर महीने लगभग 341 करोड़ रुपए ट्रांसफर करती है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023 के संकल्प पत्र में पेंशन राशि को 600 रुपए से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रतिमाह करने का वादा किया था। लेकिन यदि यह वादा लागू किया जाता है तो सरकार पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी इस योजना पर सरकार सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। यदि पेंशन राशि को बढ़ाकर 1500 रुपए किया जाता है तो मासिक खर्च बढ़कर करीब 840 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। यानी सरकार को हर महीने लगभग 500 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इससे सालाना व्यय करीब 10 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त 6 हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। सूत्रों का कहना है कि पहले से ही करीब पांच लाख करोड़ रुपए के कर्ज तले दबे राज्य के लिए फिलहाल इतनी बड़ी वित्तीय व्यवस्था करना आसान नहीं है। यही वजह है कि पेंशन बढ़ाने के प्रस्ताव पर तेजी से निर्णय नहीं हो पा रहा है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि संकल्प पत्र पांच वर्षों के लिए बनाया गया है और सरकार अपने सभी वादों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करेगी। इधर सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी होने या किसी कारण से पेंशन रुक जाने की स्थिति में हितग्राहियों को एरियर देने का निर्णय जरूर लिया है। दिसंबर 2024 में जारी निर्देशों के अनुसार जितने महीने की पेंशन रुकेगी, उतने महीने की बकाया राशि भी लाभार्थियों को दी जाएगी।

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