
- पीएम के निर्देश और सत्ता-संगठन की सख्ती बेअसर
भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसे तनावपूर्ण हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में सरकारी खर्चों और आयोजनों में सादगी अपनाने की अपील की थी। उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर अनावश्यक सब्सिडी कम करने और सार्वजनिक कार्यक्रमों, स्वागत-सत्कार में खर्चों में कटौती करने का आग्रह किया। उनका संदेश स्पष्ट था कि सरकारी आयोजनों और जनप्रतिनिधियों के कार्यकलापों में दिखावे से बचें और जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित करें। हालांकि, प्रदेश स्तर पर यह अपील जमीनी हकीकत में पूरी तरह से लागू होती नहीं दिख रही है। कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और अफसर अभी भी भारी-भरकम स्वागत, महंगे वाहन और बड़े काफिले के साथ कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। प्रदेश में हाल के महीनों में भारी-भीड़ जुटाने की कवायद, लग्जरी वाहनों और स्वागत-सत्कार का काफिला और स्वागत करते सोमवार को महिला एवं बाल विकास से जुड़ा एक और मामला तब सुर्खियों में आया, जब एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी की एक फाइव स्टार होटल में हुआ। हाल के दिनों में यह प्रवृत्ति साफ देखी गई है, और यही वजह है कि सत्ता-संगठन और प्रशासनिक तंत्र ने कुछ मामलों में कार्रवाई भी की है। लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्तर पर मितव्ययिता का पालन काफी हद तक कमजोर नजर आता है।
प्रधानमंत्री की अपील की अनदेखी के मामले अब राज्य स्तरीय चर्चा में हैं। पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर पहले ही चर्चा में आ चुके हैं। हाल ही में उनकी फोटो एक सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम में वायरल हुई, जिसके बाद उन्हें अफसरों से आग्रह कर फोटो हटवाना पड़ा। इसके बाद महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल भी सत्ता-संगठन के निशाने पर आए। सोमवार को दोनों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह के सामने पेश किया गया। उनसे पूछा गया कि प्रधानमंत्री की सादगी की अपील के बावजूद उन्होंने दिखावा क्यों किया। सफाई में रेखा यादव ने कहा कि उनके काफिले में शामिल सभी वाहन वास्तविकता से मेल नहीं खाते थे और विरोधियों ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया। वहीं, वीरेन्द्र गोयल ने कहा कि उन्हें टारगेट किया जा रहा है। सत्ता-संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि दोबारा गलती मिलने पर दोनों को पद से हटाया जा सकता है। इसके साथ ही माफी भी स्वीकार की गई।
राज्य स्तरीय कार्यशाला फाइव स्टार होटल में
ताजा मामला महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के विभाग से जुड़ा सामने आया। उनके विभाग ने 13 मई को आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यशाला के लिए राजधानी के किसी सरकारी हॉल की बजाय फाइव स्टार होटल का चयन किया। इस कार्यक्रम के फोटो-वीडियो तेजी से वायरल हुए और इसे प्रधानमंत्री की मितव्ययिता अपील की खुली अवहेलना कहा गया। इस आयोजन में लाखों रुपए खर्च किए गए, और मंत्री भूरिया स्वयं भी कार्यक्रम में शामिल हुईं। मंत्री भूरिया का कहना है कि यह कार्यक्रम अधिकारियों द्वारा तय किया गया था और उन्हें इसकी जानकारी बहुत बाद में मिली। उन्होंने आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इस महंगे आयोजन पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य की आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों तक पोषण आहार नहीं पहुंच पा रहा, लेकिन अफसर और मंत्री 1500 रुपए की थाली का आनंद ले रहे हैं। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकताओं और जनता के हितों की अनदेखी बताया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर पोषण आहार तक नहीं पहुंच पा रहा, तो इस तरह के महंगे आयोजन किस हद तक उचित हैं। यह स्थिति साफ करती है कि प्रधानमंत्री की अपील और सत्ता-संगठन की सख्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में दिखावा और महंगे खर्च जारी हैं। यह केवल प्रशासनिक दोष ही नहीं, बल्कि राजनीतिक संवेदनशीलता की कमी और जिम्मेदारी को टालने की प्रवृत्ति भी दर्शाती है। सत्ता-संगठन ने कई मामलों में चेतावनी और कार्रवाई की, लेकिन यह स्पष्ट है कि सरकारी मितव्ययिता के संदेश को जनता और मीडिया की निगरानी, साथ ही अधिकारी और नेताओं की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता के बिना लागू कर पाना कठिन है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या वास्तविक बदलाव के लिए केवल निर्देश पर्याप्त होंगे या फिर इसकी निगरानी और जवाबदेही का सख्त तंत्र होना आवश्यक है। इस पूरे मामले ने यह भी उजागर किया कि महंगे और दिखावटी कार्यक्रम जनता के विश्वास और सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। प्रधानमंत्री की सादगी की अपील का सही अर्थ तभी जीवंत हो सकता है जब हर स्तर पर जिम्मेदारी निभाई जाए और कार्यक्रमों की लागत, उद्देश्य और जनता के हितों के बीच संतुलन बना रहे।
