एमपी में 5000 करोड़ के अमृत प्रोजेक्ट्स अटके, भोपाल-इंदौर जैसे महानगर भी फिसड्डी

  • 15 जिलों में अब तक 55 फीसदी काम

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
प्रदेश में अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल और सीवरेज सिस्टम को सुधारने का काम होना है, लेकिन प्रदेश के 15 जिले ऐसे हैं जहां अब तक 55 प्रतिशत ही काम हो पाया है। हाल यह है कि भोपाल, इंदौर व ग्वालियर जैसे महानगर भी इस काम में पिछड़ गए हैं, जहां 5 साल में 70 प्रतिशत काम भी नहीं हो पाया है। 1 अक्टूबर 2021 से प्रारंभ अमृत योजना के अंतर्गत पांच हजार करोड़ रुपये के कार्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इन्हें पांच वर्ष में पूरा करना था। लेकिन प्रदेश के बड़े शहरों में ही यह काम अटके पड़े हैं।
5 जिलों में 75 से 85 प्रतिशत तक कार्य पूरा: इसका असर यह है कि 15 जिले ऐसे भी हैं जहां 75 से 85 प्रतिशत तक काम हो चुका है। इधर, दूषित पेयजल प्रबंधन के लिए एसओपी भी जारी की गई है। परियोजनाओं की सतत समीक्षा कर डीएलआरएमसी की बैठक समयसीमा में आयोजित कर कार्रवाई विवरण ई-नगर पालिका पोर्टल के डीएलआरएमसी टैब पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
एक हजार करोड़ के काम महापौर परिषदों में अटके: अमृत के अधिकांश प्रोजेक्ट महापौर परिषद (एमआइसी) में लंबित हैं। एक हजार करोड़ से अधिक के कार्यों को महापौर परिषद की अनुमति का इंतजार है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, बुरहानपुर और सागर जिलों में वर्षों पुरानी पेयजल लाइन, ड्रेनेज लाइन क्रॉस कनेक्शन बड़ी समस्या है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चहेतों को टेंडर दिलाने की चाह में एमआइसी में सहमति ही नहीं बन पाती है, और टेंडर अटके हुए हैं, जिससे शहरों का विकास प्रभावित हो रहा है। वहीं पांच हजार करोड़ रुपये के 250 जल प्रदाय कार्य । 270 वॉटर बॉडी रिजुविनेशन। हरित क्षेत्र का विकास तथा सीवरेज जैसे काम लंबित हैं।
ठेका कंपनी समेत इंजीनियरों पर कार्रवाई
हालांकि, नगरीय प्रशासन आयुक्त हर माह कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और कार्य में लापरवाही पर ठेका कंपनी व संबंधित इंजीनियरों पर भी कार्रवाई की गई है। पिछले तीन माह में ही 20 से अधिक ठेका कंपनियों को नोटिस जारी किया गया तो कुछ को ब्लैक लिस्ट भी किया है। वहीं 40 से अधिक इंजीनियरों पर निलंबन व कारण बताओ नोटिस की कार्रवाई की गई है।

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