- इंदौर में कहा- हाईकोर्ट का आदेश अस्पष्ट

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भोजशाला में मंदिर का सबूत नहीं मिला, जिससे यह पूजा स्थल नहीं है। यह स्मारक एएसआई के तहत संरक्षित है। जिसके नियमों के तहत कानूनी तौर पर पूजा-पाठ का कोई प्रावधान नहीं है। ग्वालियर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि इस मामले पर हाईकोर्ट का आदेश बहुत अस्पष्ट है। उन्होंने कहा कि जब उमा भारती मध्य प्रदेश की सीएम थीं, तब सरकारी वकील ने एएसआई की रिपोर्ट दी थी। इसमें लिखा था कि भोजशाला में कहीं भी मंदिर के प्रमाण नहीं मिले। उन्होंने कहा कि देश में इस तरह के कई विवाद पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिनमें वाराणसी का ज्ञानवापी, संभल मस्जिद और मथुरा-वृंदावन से जुड़े मामले शामिल हैं। सिंह ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के नाम पर तनाव बढ़ाना उचित नहीं है। भोजशाला विवाद का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के फैसले से ही संभव है। पूर्व सीएम ने नीट के पेपर लीक के सवाल पर कहा कि इसके लिए पूरी तरह से केन्द्र सरकार की लापरवाही दोषी है। गड़बडिय़ों को रोकने बनाई गई समिति ने विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। बार-बार सामने आ रहे परीक्षा घोटाले युवाओं के भविष्य के साथ धोखा है। सिंह ने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार को तत्काल प्रभाव से केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना चाहिए और एनटीए के चेयरमैन को पद से हटा देना चाहिए।
