- उद्यानिकी विभाग ने कार्य योजना तैयार की, उज्जैन और आसपास के जिलों में फूलों की खेती को मिलेगा बढ़ावा

भोपाल/बिच्छू डॉट कॉम
फूलों की तेजी से बढ़ती डिमांड और सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन और आसपास के जिलों में फूलों का क्लस्टर बनाया जाएगा। उद्यानिकी विभाग ने इसकी कार्य योजना तैयार कर ली है। इससे जहां किसान फूलों की खेती की तरफ आकर्षित होंगे, उनकी आय का स्थाई स्रोत बनेगा, वहीं उज्जैन में आम दिनों के साथ ही आगामी सिंहस्थ में फूलों की डिमांड पूरी की जा सकेगी। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फूलों की खपत होती है। विशेष अवसरों, त्योहारों और मेलों के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सिंहस्थ के समय देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के कारण फूलों की आवश्यकता चरम पर पहुंच जाती है। इस मांग को पूरा करने के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ ताजगी और गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। नई योजना के तहत उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में फूलों का क्लस्टर विकसित कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इससे न केवल बाहरी निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों को भी बेहतर और स्थिर बाजार उपलब्ध होगा। परिवहन लागत में कमी आने से फूलों के दाम संतुलित रहेंगे और उपभोक्ताओं को ताजे फूल मिल सकेंगे। उद्यानिकी विभाग द्वारा तैयार इस योजना के अंतर्गत किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। क्लस्टर में विशेष रूप से गुलाब, गेंदा, जरबेरा, रजनीगंधा (ट्यूबरोज), गुलदाउदी और ग्लेडियोलस जैसे उच्च मांग वाले फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
उज्जैन में खुलेगा प्रदेश का पहला सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर
अधिकारियों का कहना है कि सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर उज्जैन और आसपास के जिलों में फूलों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर खोला जा रहा है। यह सेंटर करीब 19 एकड़ में बनाया जाएगा। इसके लिए उज्जैन से करीब 16 किलोमीटर दूर बामोरा गांव में पंचकोशी यात्रा के मार्ग पर जमीन चिन्हित कर ली गई है। इसके निर्माण पर करीब 15 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह प्रदेश का पहला सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर होगा। सेंटर में उन्नत किस्म के पौधों की उपलब्धता रहेगी। सेंटर में किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक सिंचाई तकनीक, ग्रीनहाउस खेत और फसल प्रबंधन से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही उन्हें सीधे बाजार और मंडियों से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि फूलों के क्लस्टर के विकास से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। खेती के अलावा पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा।
